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यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र- रैगिंग रोकने के लिए छात्रों के अनुकूल माहौल बनाएं कॉलेज

छात्रों को रैगिंग से संबंधित सभी नियमों की जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्हें बताया जाना चाहिए कि रैगिंग के समय किस व्यक्ति से संपर्क करना है और उसका तरीका क्या होगा।

Author November 20, 2017 4:04 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

रैगिंग की प्रवृत्ति को रोकने के लिए कॉलेजों में विद्यार्थियों के अनुकूल वातावरण बनाएं। इसके तहत परिसर में सीसीटीवी कैमरों के अलावा निगरानी का एक ऐसा तंत्र तैयार किया जाए जिसमें वार्डन व मेंटर आदि भी शामिल हों। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति को पत्र लिख चार सदस्यीय कमेटी की सिफारिशों को कॉलेजों में लागू करने के लिए कहा है।  यूजीसी के पीके ठाकुर ने पत्र में लिखा कि हमें विद्यार्थियों को रैगिंग से मुक्त कॉलेज देना है। इसके लिए कॉलेज का वातावरण विद्यार्थियों के अनुकूल बनाएं। साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेएनयू के प्रोफेसर मोहन राव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। कमेटी ने ‘साइकोसोशल स्टडी आॅफ रैगिंग इन सेलेक्टेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स आॅफ इंडिया’ रिपोर्ट यूजीसी को साल 2015 में सौंपी थी। इस रिपोर्ट को अब जारी किया गया है। इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने के लिए ही यूजीसी ने कुलपतियों को पत्र लिखा है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से छह सिफारिशें की गई थीं।

इसके मुताबिक, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में नए सत्र की शुरुआत में स्वागत कार्यक्रम का आयोजन किया जाना चाहिए, जहां विद्यार्थियों को कॉलेज में स्वीकार्य और अस्वीकार्य व्यवहार की जानकारी दी जानी चाहिए। इस दौरान छात्रों को बताया जाना चाहिए कि संस्थान में रैगिंग, यौन दुर्व्यवहार और जाति, धर्म या मान्यता के आधार पर भेदभाव कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही संस्थान परिसर में सीसीटीवी कैमरों के अलावा निगरानी तंत्र में वार्डन व मेंटर आदि को शामिल किया जाए ताकि छात्र बिना संकोच उनसे बातचीत कर सकें। रैगिंग की शिकायत के लिए मानक प्रक्रिया अपनाई जाए। छात्रों को रैगिंग से संबंधित सभी नियमों की जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्हें बताया जाना चाहिए कि रैगिंग के समय किस व्यक्ति से संपर्क करना है और उसका तरीका क्या होगा। रैगिंग होने की दशा में पीड़ित और आरोपी को मनोसामाजिक और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही संस्थान जाति, धर्म, भाषा, मान्यता, लिंग आदि की विविधता को बढ़ावा दे। साथ ही इससे संबंधित समस्याओं के बारे में छात्रों और कर्मचारियों को भी जानकारी दे। अंत में संस्थान में ऐसा वातावरण बनाया जाना चाहिए, जहां विद्यार्थी लोकतांत्रिक मूल्यों को समझें, एक-दूसरे का सम्मान करें, विवादों का अहिंसक रूप से समाधान निकालें और जहां मतभेद हों पर मनभेद न हों।

 

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