जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के कई सदस्यों को गुरुवार दोपहर शिक्षा मंत्रालय की ओर एक विरोध मार्च निकालने की कोशिश करने के बाद हिरासत में ले लिया गया। जेएनयूएसयू छात्र संघ ने दावा किया कि उनकी अध्यक्ष अदिति मिश्रा, पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष नीतीश कुमार और कई अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) के अध्यक्ष सुरजीत मजूमदार और सचिव मीनाक्षी सुंद्रियाल ने जारी बयान में कहा कि जेएनयू छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग और दो जेएनयूएसयू पदाधिकारियों सहित कई छात्रों की हिरासत की कड़ी निंदा करता है। जेएनयूटीए ने सभी हिरासत में लिए गए छात्रों की तत्काल रिहाई और कानून का उल्लंघन करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी हटाने की मांग की।
छात्र गुरुवार दोपहर परिसर में स्थित साबरमती टी प्वाइंट पर एकत्रित हुए और तख्तियां एवं बैनर लेकर समूहों में आगे बढ़ने लगे, जब उन्होंने रैली को परिसर से बाहर ले जाने का प्रयास किया, तो विश्वविद्यालय के गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। आयोजकों ने कहा कि मार्च का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में कथित संस्थागत उपेक्षा को उजागर करना था। प्रदर्शन के दौरान जेएनयूएसयू और एबीवीपी के बीच पथराव और हाथापाई की घटनाएं हुईं।
जेएनयूएसयू विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के कड़े अनुपालन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने इसके अलावा ‘रोहित वेमुला अधिनियम’ बनाने, सार्वजनिक संस्थानों के लिए वित्त पोषण बढ़ाने और 16 फरवरी को एक पाडकास्ट में कथित जाति टिप्पणी करने के कारण जेएनयू कुलपति के इस्तीफे की भी मांग की है। अब एक तरफ जेएनयू में बवाल की स्थिति है, जानकार मानते हैं कि बीजेपी को भी इस विवाद का नुकसान हो रहा है। पूरी खबर के लिए यहां क्लिक करें
