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उगादि पर्व 2017: जानिए तारीख, मुहूर्त, विधि, मंत्र और पूजा से जुड़ी सारी जानकारी

Ugadi 2017: ब्रह्मपुराण के अनुसार इस त्यौहार को चैत्र मास के प्रथम दिन मनाया जाता है।

Ugadi 2017: इस दिन ब्रह्मा मूहूर्त में उठकर नित्य कामों से निवृत्त होकर अपने शरीर पर बेसन और तेल का उबटन लगाकर नहाना आदि से शुद्ध होते हैं। (photo source – PTI)

उगादि पर्व भारत वर्ष में एक विशेष महत्व रखता है। भारत में इसे विशेष रुप से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में मनाया जाता है। ब्रह्मपुराण के अनुसार इस त्यौहार को चैत्र मास के प्रथम दिन मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की और सूर्य की पहली किरण की उत्पत्ति भी इसी दिन हुई थी। इस त्यौहार को 28, 2017 को मनाया जाएगा। यह त्यौहार नए साल की शुरुआत में खुशियों को दर्शाता है। इसके बारें में कई मिथक भी हैं, ऐसा कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने पूरी दुनिया को नष्ट कर दिया और बाद में इस सुंदर दुनिया का निर्माण किया गया।

भगवान को खुश करने के लिए इस दिन मंदिरों में विशेष रुप से पूजा-अर्चना की जाती है। यह दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन महाराज युधिष्टिर का भी राज्याभिषेक हुआ और महाराजा विक्रमादित्य ने भी शकों पर विजय के उत्सव के रूप में मनाया। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र का आरंभ इसी दिन से होता है। देश में इस त्यौहार को अलग- अलग नामों से जाना जाता है। कर्नाटक में इसे गुड़ी पड़वा कहते हैं। इस त्यौहार को पूरे राज्य में उत्साह के साथ मनाया जाता है।

कैसे करें पूजा– इस दिन ब्रह्मा मूहूर्त में उठकर नित्य कामों से निवृत्त होकर अपने शरीर पर बेसन और तेल का उबटन लगाकर नहाना आदि से शुद्ध होते हैं एवं पवित्र होकर हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प और जल लेकर भगवान ब्रह्मा के मंत्रों का उच्चारण करके पूजा करते हैं। इस त्यौहार के दिन कुछ लोगों का मानना है कि सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान करने के लिए रंगोली या हल्दी, कुमकुम के साथ एक स्‍वास्तिक चिन्ह बनाना चाहिए।

कुछ पंडितों के अनुसार पूजन का शुभ संकल्प कर एक चौकी या बालू की वेदी का निर्मोण कर उसमें साफ सफेद रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर हल्दी या केसर से रंगे अक्षत से अष्टदल कमल बनाकर उस पर ब्रह्माजी की सुवर्णमूर्ति स्थापित करें। इसके बाद गणेशाम्बिका की पूजा करें और फिर इस मंत्र का जाप करें। ऊं ब्रह्मणे नमः।

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