UAE Quit OPEC: पश्चिम एशिया संकट के बीच संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने मंगलवार को ओपेक और ओपेक संघ से बाहर निकलने की घोषणा की। यूएई के इस फैसले से तेल निर्यातक समूहों और उनके वास्तविक नेतृत्वकर्ता देश सऊदी अरब को भारी झटका लगा है। इसको लेकर यूएई के ऊर्जा मंत्रालय की तरफ से बयान जारी किया गया है, जिससे ओपेक के सदस्य देशों की मुसीबतों में इजाफा हो सकता है।

UAE के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, “यह निर्णय यूएई के दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण और विकसित हो रही ऊर्जा प्रोफ़ाइल को दर्शाता है, जिसमें घरेलू ऊर्जा उत्पादन में त्वरित निवेश शामिल है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक जिम्मेदार विश्वसनीय और दूरदर्शी भूमिका निभाने की उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।”

क्या बड़ा है UAE का फैसला?

फरवरी तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ओपेक समूह में तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक था, जो सऊदी अरब और इराक के बाद तीसरे नंबर पर है। यूएई 1967 में अपने अबू धाबी अमीरात के माध्यम से ओपेक में शामिल हुआ था, और बाद में 1971 में जब यूएई एक स्वतंत्र देश बना।

यूएई के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा कहा गया कि यूएई के बाहर निकलने के बाद वह जिम्मेदारी से काम करना जारी रखेगा, मांग और बाजार की स्थितियों के अनुरूप धीरे-धीरे और योजनाबद्ध तरीके से अतिरिक्त उत्पादन को बाजार में लाएगा।”

1960 में हुआ था OPEC का गठन

पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (ओपेक) और उसके सहयोगी देश सामूहिक रूप से ओपेक+ के नाम से जाने जाते हैं, जिसकी स्थापना 1960 में संस्थापक सदस्यों सऊदी अरब, ईरान, इराक, वेनेजुएला और कुवैत द्वारा की गई थी। ओपेक का विस्तार हुआ है और वर्तमान में इसमें संयुक्त अरब अमीरात सहित 12 सदस्य देश हैं। 2016 में ही ओपेक समूह ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और रूस सहित 10 अन्य तेल उत्पादक देशों को शामिल करने का फैसला किया, जिससे ओपेक+ का गठन हुआ।

ओपेक की वेबसाइट के अनुसार संगठन का उद्देश्य अपने सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय और एकीकरण करना और तेल बाजारों को स्थिर करना है ताकि उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम की कुशल, किफायती और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके, उत्पादकों को स्थिर आय प्राप्त हो सके और पेट्रोलियम उद्योग में निवेश करने वालों को पूंजी पर उचित प्रतिफल मिल सके।

‘होर्मुज का बंद होना आर्थिक आतंकवाद, भारत पर भी पड़ा असर’, ईरान पर हमलावर हुए UAE के मंत्री

ईरान और अमेरिका के बीच आधिकारिक तौर पर अभी सीजफायर है। इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की घोषणा कर दी, लेकिन 24 घंटे के बाद ही उसने ये आदेश वापस ले लिया और इसे बंद करने की घोषणा कर दी। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने समझौता नियमों का उल्लंघन किया है। जब से यह युद्ध शुरू हुआ, उसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों पर भी हमले किए हैं। इसमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी शामिल है जिसपर ईरान ने सबसे अधिक हमले किए। पढ़िए पूरी खबर…