ताज़ा खबर
 

ऐसे की जाती है भूकंप की माप

रिक्टर पैमान पर 8.0 या उससे अधिक तीव्रता वाला भूकंप पूरा दुनिया में हर साल औसतन एक बार आता है।

चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

भूकंप की तीव्रता रिक्टर मैग्निटूड स्केल या रिक्टर स्केल पर मापी जाती है। मैग्निटूड भूकंप के दौरान निकलने वाली ऊर्जा को मापने का प्रतिमान है। भूकंप की तीव्रता को 1 से 10 तक की लॉगरिदमिक तालिका पर मापा जाता है। यूनाइटेड स्टेट्स जियोग्राफिकल सर्वे के अनुसार रिक्टर पैमाने पर तीव्रता के आधार पर भूकंप को सात वर्गों में बांटा गया है।

इनमें सबसे हल्का माइक्रो (सूक्ष्म) भूकंप 3.0 मैग्निटूड से कम तीव्रता वाला होता जिसमें बिल्कुल नहीं या बहुत मामूली नकुसान होता है। पूरी दुनिया में करीब 13 लाख ऐसे माइक्रो भूकंप हर साल आते हैं। दूसरा वर्ग माइनर (छोटे) भूकंप का है। इस वर्ग में रिक्टर पैमाने पर 3.0 से 3.9 तीव्रता वाले भूकंप आते हैं। ऐसे भूकंप से भी बिल्कुल नहीं या मामूली नुकसान होता है। हर साल पूरी दुनिया में 49 हजार से 1.30 लाख ऐसे माइनर भूकंप आते हैं।

तीसरा वर्ग है लाइट (हल्के) भूकंप का। इसके तहत रिक्टर पैमाने पर 4.0 से 4.9 मैग्निटूड वाले भूकंप आते हैं। इनसे सामान्य नुकसान पहुंचता है। एक साल में ऐसे 6200 से 13000 भूकंप पूरी दुनिया में आते हैं। चौथा वर्ग मॉडरेट (सामान्य) भूकंप का है जिसके तहत 5.0 से 5.9 तीव्रता वाले भूकंप आते हैं। पूरी दुनिया में हर साल करीब 800 से 1319 मॉडरेट भूकंप आते हैं। इन भूकंप से उल्लेखनीय क्षति पहुंचती है।

पांचवा वर्ग स्ट्रॉन्ग (तगड़ा) भूकंप का है। इसके तहत 6.0 से 6.9 तीव्रता वाले भूकंप आते हैं और इनसे गंभीर नुकसान होता है। पूरी दुनिया में हर साल ऐसे 120 से 134 भूकंप आते हैं। छठा वर्ग है मेजर (बड़े) भूकंप का। इसका प्रभाव भूकंप के केंद्र से काफी दूर तक महसूस किया जाता है। इससे बड़ पैमाने पर तबाही होती है। हर साल पूरी दुनिया में ऐसे 17.18 भूकंप आते हैं।

सातवां वर्ग ग्रेट (व्यापक) भूकंप का है। रिक्टर पैमाने पर ऐसे भूकंप की तीव्रता 8.0 या उससे ज्यादा होती है। ऐसे भूकंप से भयानक नुकसान होता है। ऐसे भूकंप का प्रभाव भूकंप के केंद्र से हजारों किलोमीटर दूर भी महसूस होता है। इतनी उच्च तीव्रता भूकंप हर साल औसतन एक बार आता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App