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लॉकडाउन में दो हजार किमी दूर घर जाने का नहीं था साधन, फैक्ट्री में पिटाई, गैंगरेप से बचने के लिए जंगलों में छिप गई महिलाएं, ऐसे हुईं नर्क से मुक्त

झारखंड के दुमका की रहने वाली महिलाओं का आरोप है कि कर्नाटक में फैक्ट्री में उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ, पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है।

Author बेंगलुरु | Updated: June 11, 2020 8:28 AM
प्रतीकात्मक फोटो।

कोरोनावायरस के चलते देशभर में लगाए गए लॉकडाउन का सबसे बुरा असर प्रवासी मजदूरों पर ही पड़ा है। हालात ऐसे रहे कि सरकार की तरफ से सुविधा न मिलने पर हजारों की संख्या में लोग पैदल ही अपने गृह राज्यों की तरफ लौटने लगे। हालांकि, इस दौरान भी उन्हें अलग-अलग तरीकों से शोषण का शिकार होना पड़ा। ताजा मामला दुमका के झारखंड की रहने वाली दो आदिवासी महिलाओं का है, जो कर्नाटक की एक फैक्ट्री में काम करती थीं। इन दोनों महिलाओं का आरोप है कि लॉकडाउन के बाद उन्हें कथित तौर पर उसी फैक्ट्री में बंद रखा गया, जहां वे काम करती थीं। फैक्ट्री में उनके साथ हिंसा होती थी। एक महिला का तो यहां तक आरोप है कि फैक्ट्री में दो कामगारों ने उसके साथ गैंगरेप किया।

महिलाओं का कहना है कि जनवरी में उन्होंने पहली बार फैक्ट्री से भागने की कोशिश की। लेकिन फैक्ट्री सुपरवाइजर ने उन्हें पकड़ लिया और मालिक की कार से वापस ले आया। उन्हें फैक्ट्री में ही बंद कर दिया गया और मारपीट के साथ रेप की धमकी दी गई। महिलाओं के आधार कार्ड के साथ उनके फोन भी छीन लिए गए। एक महिला का आरोप है कि फैक्ट्री के दो लोगों ने उससे बाद में रेप किया।

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मार्च में लॉकडाउन के ऐलान के बाद महिलाओं ने एक बार फिर भागने की कोशिश की। इस बार अपनी दो बेटियों के साथ भागते हुए वे कुम्बालागोडू के जंगल में जा छिपीं। यहां से वे सिर्फ खाना मांगने ही बाहर गांवों में जाती थीं। महिलाओं का कहना है कि उनकी परेशानी देखकर एक कॉन्ट्रैक्टर ने उन्हें रहने के लिए जगह और खाना दिया। लेकिन 21 मई को एक कॉन्ट्रैक्टर का फोन आया, जिसने उन्हें संबंध बनाने की धमकी दी। इसके बाद दोनों महिलाएं पुलिस के पास पहुंच गई।

पुलिस का कहना है कि महिला ने जिन लोगों पर आरोप लगाए, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में 23 मई को एक एफआईआर भी दर्ज हुई थी, जिसमें दो फैक्ट्री वर्कर्स पर आईपीसी की धारा 376डी और एससी-एसटी प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए। पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, दोनों महिलाओं ने पिछले साल अक्टूबर में फैक्ट्री में काम शुरू किया था। उन्हें 15 घंटे तक काम कराया जाता और हफ्ते के 200 रुपए दिए जाते थे, जबकि उनसे वादा 9 हजार रुपए देने का किया गया था। पुलिस का कहना है कि फैक्टरी का मालिक चेन्नई में है और कोरोना की वजह से हम उस तक पहुंच नहीं पाए हैं। लेकिन महिलाओं की शिकायत के आधार पर जांच जारी है।

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