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इथियोपिया में अगवा दो भारतीय रिहा, सोशल मीडिया के जरिए भारतीय विदेश मंत्रालय से मांगी थी मदद

इथियोपिया में भारत-स्पेन के एक संयुक्त उपक्रम के तहत चल रहे हाइवे निर्माण कार्य में जुटी भारतीय कंपनी आइएल एंड एफएस और स्पेनिश कंपनी एल्सामेक्स एसए की आइटीएलएल-एल्सामेक्स ने बीते तीन महीने से स्थानीय वेंडरों का भुगतान रोका हुआ था।

विदेश मंत्री सुषम स्वराज (Photo: Express Photo by Renuka Puri)

इथियोपिया में भारतीय कर्मचारियों को अगवा करने वाले स्थानीय नागरिकों के नरम पड़ने के संकेत मिलने लगे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के वार्ताकारों से बकाए के भुगतान का आश्वासन मिलने के बाद उन लोगों ने दो बंधकों को रिहा कर दिया है। अन्य पांच बंधकों को छुड़ाने के लिए बातचीत जारी है। अपहर्ताओं ने उन सभी को टेलीफोन पर अपने परिजनों और भारतीय अधिकारियों से संपर्क करने की इजाजत दी है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, जिन दो भारतीयों को शनिवार की देर रात रिहा करा लिया गया, उनके नाम हैं- हरीश बांदी और भास्कर रेड्डी। आइएल एंड एफएस के द्वारा जल्द भुगतान का भरोसा मिलने के बाद इन दोनों को इथियोपियाई अपहर्ताओं ने छोड़ा। बंधक संकट 25 नवंबर को शुरू हुआ। बंधक बनाए गए एक व्यक्ति चैतन्य हरी ने 28 नवंबर को सोशल मीडिया के जरिए भारतीय विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा था जिसके बाद यह खबर सामने आई।

इथियोपिया में भारत-स्पेन के एक संयुक्त उपक्रम के तहत चल रहे हाइवे निर्माण कार्य में जुटी भारतीय कंपनी आइएल एंड एफएस और स्पेनिश कंपनी एल्सामेक्स एसए की आइटीएलएल-एल्सामेक्स ने बीते तीन महीने से स्थानीय वेंडरों का भुगतान रोका हुआ था। भारतीय कंपनी आइएल एंड एफएस 90 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज में फंसी हुई है और रिजर्व बैंक ने इसके तमाम लेन-देन पर रोक लगा रखी है। इससे नाराज होकर स्थानीय लोगों ने 25 नवंबर को सात भारतीय कर्मचारियों को अगवा कर दो प्रांतों में तीन जगह ले जाकर बंधक बना लिया। बंधक संकट शुरू होने के बाद से ही विदेश मंत्रालय ने इथियोपियाई सरकार के जरिए अपहर्ताओं से वार्ता शुरू कर दी थी। संयुक्त उपक्रम वाली कंपनी ने स्थानीय लोगों को सिक्योरिटी सेवा के लिए नौकरी पर रखा गया था। भारत-स्पेन संयुक्त उपक्रम की नई कंपनी ने इथियोपियाई सरकार के साथ 2016 में देश में 160 किलोमीटर की सड़क बनाने का करार किया था। इस सड़क के जरिए ओरोमिया के नेकेम्टी और अमहारा के बूरे शहरों को जोड़ने की योजना थी। सड़क निर्माण के लिए कंपनी इथियोपियाई सड़क प्राधिकरण के साथ मिल कर अप्रैल 2016 से काम कर रही थी। भारतीय कंपनी के लोगों को बंधक बनाने वाले भी इसी कंपनी के लिए काम करते थे और तीन महीने से तनख्वाह नहीं मिलने के कारण नाराज थे।

बंधक बनाए गए खुर्रम इमाम ने विदेश मंत्रालय से नए सिरे से संपर्क साधा है। वे आइएल एंड एफएस कंपनी में वरिष्ठ इंजीनियर (हाइवे) के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि बीते दो-तीन महीने से कंपनी का काम ठप था, फिर भी स्थानीय कर्मचारियों को तनख्वाह दी जा रही थी। अक्तूबर और नवंबर की तनख्वाह नहीं मिलने पर उन लोगों ने बंधक बना लिया। बिहार के रहने वाले खुर्रम के मुताबिक इथियोपिया में आइएल एंड एफएस कंपनी तीन परियोजनाओं पर काम कर रही थी। इन तीन परियोजनाओं में तीन शिविर हैं। इन तीन शिविरों में तैनात भारतीय कर्मचारियों को बंधक बनाया गया। उन्होंने फोन से इथियोपिया के स्थानीय प्रशासन से बात की है और भारतीय दूतावास को पत्र भेज कर अपनी स्थिति बताई है।

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