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दो भारतीय कंपनियां देश से बाहर कर सकती हैं पंचनिर्णय: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें उसने कहा है कि दो भारतीय कंपनियां, सासन पावर लिमिटेड ...

Author नई दिल्ली | Published on: August 25, 2016 11:08 PM
सुप्रीम कोर्ट की तस्वीर। (File Photo)

उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें उसने कहा है कि दो भारतीय कंपनियां, सासन पावर लिमिटेड और नॉर्थ अमेरिकन कोल कॉरपोरेशन इंडिया प्रा. लि. यदि इस बात पर सहमत हैं तो वे भारत से बाहर विदेशी कानून के तहत पंच निर्णय करवा सकती हैं। न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर और ए.एम. सपरे ने इस संबंध में रिलायंस पावर की कंपनी सासन पावर लिमिटेड की याचिका को खारिज करते हुए कहा, ‘हमें उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले में हस्तक्षेप करने की कोई वजह नजर नहीं आती है। इसलिये अपील को उसकी लागत के साथ खारिज किया जाता है।’

अनिल धीरूभाई अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस पावर समूह की कंपनी सासन पावर लिमिटेड मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में अल्ट्रा मेगा पावर परियोजना (यूएमपीपी) का परिचालन करती है। कंपनी का नॉर्थ अमेरिकन कोल कॉरपोरेशन इंडिया प्रा. लि. के साथ हुए समझौते की कुछ धाराओं को लेकर विवाद है। सासन पावर लिमिटेड ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील की थी। उच्च न्यायालय ने मामले में फैसला दिया था कि जब पार्टियां अपने सभी विवाद पंच निर्णय के जरिए सुलझाने पर सहमत हैं तो वे मध्यस्थता से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

यूएमपीपी का कहना है कि किन्हीं दो भारतीय कंपनियों के बीच कोई भी पंच निर्णय की प्रक्रिया किसी बाहरी देश में नहीं हो सकती है। दो भारतीय पार्टियों के बीच घरेलू पंच निर्णय के मामले में मध्यस्थता कानून पूरी तरह से स्पष्ट है। शीर्ष अदालत को मामले में उच्च न्यायालय के इस फैसले में कोई खोट नजर नहीं आती है कि कंपनियों के बीच पंच निर्णय की कारवाई ब्रिटेन के कानून के तहत लंदन में चलाई जा सकती है। सासन पावर लिमिटेड की 3,960 मेगावाट की अल्ट्रा मेगा परियोजना के लिए वर्ष 2009 में अमेरिका की नार्थ अमेरिकन कोल कारपोरेशन के साथ तकनीकी सलाह से जुड़े मुद्दों पर सहमति ज्ञापन समझौता किया गया था।

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