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टॉप आर्मी ऑफिसर ने कहा- दो मोर्चे पर युद्ध स्मार्ट आइडिया नहीं, सेना प्रमुख कह चुके हैं भारत ढाई मोर्चों पर जंग के लिए है तैयार

जून 2017 में रावत ने कहा था कि भारत ढाई मोर्चे पर जंग के लिए तैयार है। टॉप आर्मी ऑफिसर 28 फरवरी को पंजाब विश्वविद्यालय में एक सेमिनार में हिस्सा लेने आए थे। सिंह ने यहां कहा कि पाकिस्तान के मसले पर सवार्धिक लाभ पाने के लिए भारत को चीन के साथ अपने रिश्ते सुधारने चाहिए।

पंजाब वि.वि. में बुधवार को सेमिनार को संबोधित करते लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंदर सिंह। (एक्सप्रेस फोटो)

जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंदर सिंह ने बुधवार को कहा कि दो मोर्चे पर युद्ध स्मार्ट आइडिया नहीं है। यह प्रतिक्रिया उन्होंने पाकिस्तान के साथ संबंधों में सामान्यता लाने के लिए सैन्य कूटनीति की दलील देते हुए कही, जबकि सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत की इस मसले पर राय कुछ और ही है। जून 2017 में रावत ने कहा था कि भारत ढाई मोर्चे पर जंग के लिए तैयार है। टॉप आर्मी ऑफिसर 28 फरवरी को पंजाब विश्वविद्यालय में एक सेमिनार में हिस्सा लेने आए थे। उन्होंने यहां कहा कि पाकिस्तान के मसले पर सवार्धिक लाभ पाने के लिए भारत को चीन के साथ अपने रिश्ते सुधारने चाहिए। सिंह के मुताबिक, “यह एक तरफ से हमारी सीमा की रक्षा करेगा। लोग अक्सर दो मोर्चे के युद्ध की बातें करते रहते हैं। लेकिन यह कभी भी अच्छा आइडिया नहीं रहा है।” उन्होंने आगे बताया कि पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए कई और विकल्प हैं, जिसमें कुछ संधियां हो सकती हैं।

उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तानी सेना से हमें वार्ता करनी चाहिए। मैं इस बात से सहमत हूं कि हमारी तरफ भी सैन्य कूटनीति काफी मायने रखती है। ऐसे में दोनों देशों की सेनाएं साथ में बातचीत कर तय करना चाहिए कि वे इस मसले पर आगे क्या कर सकती हैं।”

चीन का जिक्र करते हुए वह बोले कि दोनों देशों के बीच के संबंधों का प्रबंधन किया जा सकता था। उन्होंने आगे बताया, “चीन के साथ उस प्रकार की दुश्मनी नहीं है। हालांकि, सीमा को लेकर विवाद है। अगर हम चीन के साथ अपने संबंधों में सुधार कर लें तो हम पाकिस्तान से निपटने में आसानी होगी। चीन के साथ काम कर हम अपनी एक तरफ की सीमा को सुरक्षित रख सकते हैं।” पाकिस्तान के साथ संघर्ष की आशंका पर लेफ्टिनेंट ने कहा कि कई बार परंपरागत संघर्ष नहीं होते हैं, क्योंकि आप कोई बड़ी सैन्य लक्ष्य पूरा कर सकते हैं। मगर उस वक्त आप जनता की राय के अनुसार, संघर्ष में धकेल दिए जा चुके होते हैं।

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