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कर्ज माफी से पैसों की किल्लत, पीएम की स्कीम लागू नहीं कर पा रहे दो बीजेपी शासित राज्य

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से महाराष्ट्र की समस्या को लेकर कहा गया कि, 'हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के लिए राज्य को कितने पैसे लगेंगे इस बात की अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है। अगर वर्तमान लाभार्थियों को छोड़ दिया जाता है तो बड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना होगा।'

Author Published on: July 9, 2018 10:42 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- पीटीआई)

बीजेपी शासित दो राज्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वकांक्षी नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन (एनएचपीएम) को लागू करने को लेकर चिंता जताई है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा किसानों के 22 हजार करोड़ रुपए के ऋण माफी की घोषणा के बाद राज्य के पास एनएचपीएम ज्वॉइन करने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं बची है तो वहीं राजस्थान सरकार ने भी इस मिशन को लागू करने को लेकर चिंता जताई है। हाल ही में मुंबई में आयुष्मान भारत सेक्रेटेरिएट के अधिकारियों की मीटिंग हुई थी, जिसमें महारष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री दीपक सावंत और चीफ सेक्रेटरी डीके जैन ने पूंजी की कमी होने की बात कही थी। सावंत ने कहा था कि राज्य सरकार के पास एनएचपीएम को लागू करने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है।

बता दें कि महाराष्ट्र में पहले से ही सबसे व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में से एक स्कीम है। वह है महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना। इस योजना के तहत महाराष्ट्र के करीब 2.2 करोड़ लोगों को 2 लाख रुपए का हेल्थ इंश्योरेंस दिया गया है। ऐसे में अब महाराष्ट्र के सामने यह समस्या खड़ी हो गई है कि अगर वह केंद्र सरकार की एनएचपीएम को ज्वॉइन करता है तो वह आरोग्य योजना के लाभार्थियों को इससे अलग नहीं रख सकता। वहीं दूसरी तरफ लाभार्थियों को हेल्थ कवर के तौर पर पांच लाख रुपए देना बहुत बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता होगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से महाराष्ट्र की समस्या को लेकर कहा गया कि, ‘हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के लिए राज्य को कितने पैसे लगेंगे इस बात की अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है। अगर वर्तमान लाभार्थियों को छोड़ दिया जाता है तो बड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना होगा। वहीं दूसरी तरफ किसानों की कर्ज माफी के कारण सरकार के सामने पूंजी को लेकर और भी बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।’

वहीं राजस्थान में पूंजी को लेकर समस्या नहीं है, बल्कि वहां तार्किक आधार पर समस्या खड़ी हो रही है। राजस्थान में पहले से ही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना (बीएसबीवाई) है, जिसके तहत राज्य के 4.5 करोड़ लोगों को मुफ्त में स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं दी जाती हैं, इसमें अधिकतम सीलिंग 3.30 लाख रुपए है। ऐसे में वसुंधरा राजे सरकार के सामने यह समस्या है कि एनएचपीएम और बीएसबीवाई को एक ही प्लेटफॉर्म में किस तरह से लाया जाए। केंद्र सरकार के एक अधिकारी का कहना है, ‘राजस्थान सरकार इस बात को लेकर अभी स्पष्ट नहीं है कि उनके राज्य में दोनों स्कीम को एकसाथ कैसे लागू किया जाए, क्योंकि राज्य के पास खुद एक योजना है और इस योजना को पाने के लिए सरकार ने हेल्थ कार्ड दिया हुआ है।’

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