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पहले किया था इंकार, अब संसदीय समिति के सामने पेश हुए टि्वटर के अधिकारी

टि्वटर के अधिकारियों ने पहले कम समय का हवाला देते हुए संसदीय समिति के समक्ष पेश होने से इंकार कर दिया था, लेकिन कार्रवाई की चेतावनी के बाद अधिकारी सोमवार को संसद पहुंच गए।

Author February 11, 2019 5:28 PM
संसदीय समिति के सामने पेश होने पहुंचे टि्वटर के अधिकारी। (photo: ANI)

संसदीय समिति ने सोशल मीडिया मंचों पर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट के टि्वटर के अधिकारियों को तलब किया था। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली इस संसदीय समिति ने एक फरवरी को एक आधिकारिक पत्र लिखकर ट्विटर को सम्मन किया था। सम्मन जारी होने के बाद पहले तो टि्वटर के सीईओ और शीर्ष अधिकारियों ने संसदीय समिति के समक्ष पेश होने से इनकार कर दिया था। लेकिन जब समिति के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी तो सोमवार (11 फरवरी) को टि्वटर की टीम पेश होने पहुंची। एएनआई के अनुसार, टि्वटर की टीम जिसमें टि्वटर इंडिया के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, संसदीय समिति के समक्ष पेश होने के लिए संसद भवन पहुंचे।

संसदीय समिति की बैठक पहले सात फरवरी को होनी थी लेकिन ट्विटर के सीईओ और अन्य अधिकारियों को अधिक समय देने के लिए बैठक को 11 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। सूत्रों ने बताया कि यात्रा के लिए दस दिन का समय दिये जाने के बावजूद टि्वटर ने ‘कम समय में सुनवाई नोटिस देने’ को वजह बताते हुए समिति के समक्ष पेश होने से इनकार कर दिया था। सूचना-प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसदीय समिति की ओर से टि्वटर को एक फरवरी को भेजे गए पत्र में स्पष्ट तौर पर कंपनी के प्रमुख को समिति के समक्ष पेश होने को कहा गया था। पत्र में साथ ही कहा गया था, ‘‘वह अन्य प्रतिनिधियों के साथ आ सकते हैं।’’

इसके बाद संसदीय समिति को सात फरवरी को ट्विटर के कानूनी, नीतिगत, विश्वास और सुरक्षा विभाग की वैश्विक प्रमुख विजया गड्डे की ओर से एक पत्र मिला था। उस पत्र में कहा गया था, ‘‘टि्वटर इंडिया के लिए काम करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत में सामग्री और खाते से जुड़े हमारे नियमों के संबंध में कोई प्रभावी फैसला नहीं करता है।’’ गड्डे के पत्र में कहा गया है कि भारतीय संसदीय समिति के समक्ष ट्विटर के प्रतिनिधित्व के लिए किसी कनिष्ठ कर्मचारी को भेजना भारतीय नीति निर्माताओं को अच्छा नहीं लगा, खासकर ऐसे में जब उनके पास निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है। (भाषा इनपुट के साथ)

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