अभिनेता विजय शुक्रवार को तमिलनाडु में सरकार बनाने के काफी करीब पहुंच गए। डीएमके के सहयोगी दलों सीपीआई, सीपीएम और आईयूएमएल ने उनकी पार्टी टीवीके को समर्थन दे दिया। इससे उनकी नई पार्टी के गठबंधन को खंडित विधानसभा में बहुमत के करीब पहुंचने में मदद मिली। हालांकि, वीसीके का समर्थन पत्र अभी तक राज्यपाल को नहीं मिला है, इसलिए यह साफ नहीं है कि शपथ ग्रहण समारोह कल होगा या नहीं।
शाम तक विजय ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की और गहन वार्ता और राजनीतिक उलटफेर के बाद सरकार बनाने का दावा पेश किया। विधानसभा चुनाव में टीवीके ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरी। विजय की पार्टी ने डीएमके और एआईएडीएमके के दशकों पुराने वर्चस्व को चकनाचूर कर दिया।
कितनी पहुंच जाएंगी सीटें?
कांग्रेस के पांच विधायकों और सीपीआई, सीपीआई (एम), वीसीके और आईयूएमएल के दो-दो विधायकों के समर्थन से टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन की सीटें 120 तक पहुंच जाएंगी और उम्मीद है कि विजय शनिवार को सुबह करीब 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। लेकिन सूत्रों के अनुसार, वीसीके का पत्र अभी तक नहीं पहुंचा है, इसलिए कुछ अनिश्चितता बनी हुई है।
एक समय तो डीएमके विरोधी गुट के कुछ वर्गों के अंदर इस बात पर भी चर्चा हुई कि अगर वीसीके नेता थोल थिरुमावलवन अपनी लोकसभा सीट से इस्तीफा देकर तिरुची पूर्व से उपचुनाव लड़ते हैं तो वे उपमुख्यमंत्री बन सकते हैं। विचाराधीन व्यवस्था तमिलनाडु की मौजूदा असामान्य राजनीतिक स्थिति को दिखाती है। वार्ता से परिचित नेताओं के अनुसार, सीपीआई और सीपीआई (एम) ने बाहर से समर्थन देने का विकल्प चुना है।
इस बीच, आईयूएमएल का समर्थन कांग्रेस से जुड़े एक व्यापक राजनीतिक समझौते से संबंधित प्रतीत होता है। बातचीत से परिचित नेताओं ने बताया कि कांग्रेस ने कथित तौर पर आईयूएमएल को तमिलनाडु में टीवीके को समर्थन देने के बदले केरल में मंत्रिमंडल में एक पद देने की पेशकश की थी। टीवीके कार्यालय जाने से पहले डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के आवास पर उनसे मुलाकात करने वाले आईयूएमएल नेताओं ने बताया कि उन्होंने निवर्तमान मुख्यमंत्री को स्थिति से अवगत कराया था और उन्होंने उनसे सरकार गठन में सहयोग करने का अनुरोध किया था।
गुरुवार को जब टीवीके के नेता आईयूएमएल कार्यालय गए, तो उन्हें तुरंत बता दिया गया कि डीएमके द्वारा ऐसा करने के लिए कहे बिना समर्थन देना असंभव है।
विधानसभा पुनर्गठन की गति बेहद आश्चर्यजनक
विधानसभा पुनर्गठन की गति बेहद ही हैरान करने वाली थी। महज एक दिन पहले आर्लेकर ने विजय को पूर्ण बहुमत ना होने की वजह से वापस लौटने को कहा था। इससे नाराज कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और राज्यपाल पर विधानसभा गठन प्रक्रिया में देरी करने का आरोप लगाया।
सीपीआई और सीपीआईएम ने समर्थन देने की घोषणा की
इसके बाद समर्थन में तेजी से बदलाव आने लगा। शुक्रवार शाम चेन्नई में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में , सीपीआई के प्रदेश सचिव एम. वीरपांडियन और सीपीआई (एम) नेता पी. शनमुगम ने विजय को अपना समर्थन देने की औपचारिक घोषणा की। दोनों नेताओं ने कहा, “हम टीवीके कैबिनेट में शामिल नहीं होंगे, हमारा समर्थन बाहर से होगा। हम सांप्रदायिक ताकतों का विरोध करने और तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा करने के संघर्ष में डीएमके के साथ बने रहेंगे।”
राज्यपाल को लिखे अपने पत्र में, सीपीआई ने अपने समर्थन को स्थिर, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक सरकार के लिए जरूरी बताया। वामपंथी दलों की तरफ से टीवीके को समर्थन देने की घोषणा करने के बाद स्टालिन ने राज्यपाल से नई सरकार के गठन के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।
शुक्रवार को एक मलयालम चैनल से बात करते हुए, सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी ने पुष्टि की कि जनादेश डीएमके गठबंधन और एआईएडीएमके-एनडीए गठबंधन दोनों के खिलाफ था और सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके और उसके सहयोगियों के बाहरी समर्थन से एआईएडीएमके सरकार स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं और इस तरह की व्यवस्था को राजनीतिक रूप से अनैतिक और जनता के जनादेश के खिलाफ बताया।
बातचीत जारी रहने के बावजूद समर्थक टीवीके मुख्यालय और पानायूर स्थित विजय के आवास के बाहर जमा हो गए, नारे लगा रहे थे और पार्टी के झंडे लहरा रहे थे। इनमें से कई युवा, पहली बार राजनीति में आए वॉलंटियर थे।
टीवीके अपने विधायकों पर रख रही नजर
विधायकों की सुरक्षा को लेकर आशंकाओं के बीच, टीवीके महाबलीपुरम के एक रिसॉर्ट में ठहरे अपने विधायकों पर कड़ी नजर रख रही है। पांच में से चार कांग्रेस विधायक शुक्रवार शाम को हैदराबाद के एक रिसॉर्ट के लिए रवाना हो गए थे। पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में ठहरे एआईएडीएमके के सभी विधायकों को शनिवार दोपहर तक चेन्नई पहुंचने के लिए कहा गया था।
विजय बनेंगे CM या तमिलनाडु में लगेगा राष्ट्रपति शासन
तमिलनाडु में इस पूरी सियासी उठापटक के बीच कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। राज्यपाल के विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने में देरी किए जाने के फैसले ने इस बहस को तेज कर दिया है कि राज्यपाल का अधिकार बड़ा है या जनता का जनादेश? अगर विजय बहुमत साबित नहीं कर पाते हैं तो क्या होगा? क्या तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लगेगा? दोबारा चुनाव होंगे? जनसत्ता ने तमिलनाडु के इन सियासी हालातों पर संविधान विशेषज्ञ, वरिष्ठ वकील और पूर्व मुख्य निर्वाचन आयोग से बात की है। इन सभी ने तमिलनाडु के राज्यपाल आर्लेकर के इस फैसले को लेकर अलग-अलग विचार पेश किए हैं। पढ़ें पूरी खबर…
