सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को नोएडा की मॉडल-से-एक्टर बनी त्विषा शर्मा की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) लिया। इससे यह मामला अब सिर्फ स्थानीय आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर न्यायिक जांच और निगरानी का विषय बन गया है। बता दें कि यह 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में 26 वर्षीय त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से शुरू हुआ था। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई की।

सुनवाई करने वाली बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के अलावा, पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में क्या बड़ी बातें कहीं

-सुप्रीम कोर्ट ने मॉडल-अभिनेत्री त्विषा शर्मा की मौत के मामले में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट द्वारा दूसरे पोस्टमार्टम के लिए तुरंत आदेश दिए जाने की सराहना की है।

-सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से भी अपील की कि मामले से जुड़े घटनाक्रम की रिपोर्टिंग करते समय संयम और जिम्मेदारी बरती जाए।

-सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि पूर्व न्यायाधीश और त्विषा की सास गिरिबाला मीडिया में जांच से संबंधित कोई बयान नहीं देंगी।

-शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में कुछ घटनाक्रम और कार्रवाइयां चिंताजनक हैं लेकिन चीजों को कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।

-सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इस बहुचर्चित और संवेदनशील मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की जा चुकी है।

-दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है जिसकी निष्पक्ष और तटस्थ जांच की आवश्यकता है: उच्चतम न्यायालय ने त्विषा शर्मा की मौत के मामले में कहा

-हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह त्विषा शर्मा के परिवार के बयान रिकॉर्ड न करे और उनके दर्द को महज ‘साउंड बाइट’ बनाकर पेश न करे: उच्चतम न्यायालय। 

  • -हम यह सुनिश्चित करेंगे कि घटना की निष्पक्ष जांच हो: उच्चतम न्यायालय ने त्विषा शर्मा मौत मामले में कहा।

-मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मीडिया के हस्तक्षेप के कारण ही त्विषा शर्मा मामले में काफी प्रगति हुई है।

-इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सामना करने से बेहतर है कि बेटी का तलाक हो जाए: सॉलिसिटर जनरल ने त्विषा शर्मा मामले में कहा।

-सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल के इस आश्वासन को दर्ज किया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के संबंध में जल्द फैसला किया जाएगा।

-उच्चतम न्यायालय ने संभावित गवाहों और आरोपियों द्वारा मीडिया में बयान देने पर रोक लगाई।

-सर्वोच्च अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दायर मामले का निपटारा करते हुए कहा कि पक्षकार उचित मंच के समक्ष कानूनी उपाय तलाशने के लिए स्वतंत्र हैं।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ट्विशा की मौत आत्महत्या थी या फिर दहेज प्रताड़ना और किसी साजिश/हिंसा से जुड़ी हुई थी। आपको बता दें कि त्विषा की मौत के बाद से ही यह मामला तेजी से गंभीर होता गया और इसमें दहेज उत्पीड़न के आरोप, आत्महत्या और हत्या के परस्पर विरोधी दावे, फॉरेंसिक रिपोर्ट को लेकर विवाद, प्रदर्शन, गिरफ्तारियां, अदालतों में कानूनी लड़ाई और सीबीआई जांच की मांग जैसी कई बातें जुड़ गईं।

क्या है त्विषा शर्मा मौत मामला?

ट्विशा शर्मा ने दिसंबर 2025 में अधिवक्ता समर्थ सिंह से शादी की थी। इससे पहले उसी वर्ष मई में नोएडा के एक फ्लैट में उनकी सगाई हुई थी। शादी के बाद ट्विशा भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में रहने लगी थीं जहां समर्थ अपने परिवार के साथ रहता था। समर्थ, सेवानिवृत्त जिला जज गिरीबाला सिंह के बेटे हैं।

यह मामला 12 मई को सामने आया जब ट्विशा अपने ससुराल के घर में मृत पाई गईं। उनकी मौत के अंतिम घंटों में क्या हुआ, इसे लेकर लगभग तुरंत ही अलग-अलग और विरोधाभासी दावे सामने आने लगे। घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज शुरुआती और सबसे अहम सबूतों में से एक बन गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फुटेज में ट्विशा को सीढ़ियों से ऊपर छत की ओर जाते हुए देखा गया। करीब एक घंटे बाद तीन लोग उन्हें सीपीआर देने की कोशिश करते दिखाई दिए जिसके बाद उन्हें नीचे ले जाया गया। हालांकि, फुटेज में छत पर क्या हुआ, यह कैद नहीं हो सका जिससे घटनाक्रम की टाइमलाइन में एक बड़ा खाली हिस्सा रह गया। यही गायब समय अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

त्विषा दहेज उत्पीड़न का शिकार हुई?

परिवार ने आरोप लगाया कि त्विषा दहेज उत्पीड़न का शिकार हुई थीं और उनकी मृत्यु के कारणों पर सवाल उठाए। घटना के तुरंत बाद त्विषा के परिवार द्वारा उसकी सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह द्वारा न्यायिक अधिकारियों और सीसीटीवी टैक्नीशियनों को किए गए कथित फोन कॉल की जांच की मांग के बाद यह मामला व्यापक रूप से चर्चा में आया। परिवार ने मामले से जुड़े डिजिटल एविडेंस और फोन रिकॉर्ड की जांच की भी मांग की।

त्विषा के व्हाट्सऐप मैसेज से गहराया शक

त्विषा शर्मा की कथित आखिरी चैट और संदेशों ने इस मामले को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया। उनके परिवार और समर्थकों का दावा है कि ये संदेश इस बात के संकेत थे कि मौत से पहले त्विषा गहरे मानसिक तनाव में थीं।

रिपोर्ट्स में बार-बार जिस संदेश का जिक्र हुआ, उसमें लिखा था, ”मैं फंस गई हूं भाई… बस तू मत फंसना।” यह मैसेज इस मामले से जुड़ी सबसे चर्चित लाइन में से एक बन गया और उन लोगों द्वारा लगातार इसका जिक्र किया गया जो आरोप लगा रहे हैं कि त्विषा अपने वैवाहिक घर में भावनात्मक दबाव और प्रताड़ना का सामना कर रही थीं। परिवार का कहना है कि यह मैसेज उनकी मौत से पहले के दिनों में डर, बेबसी और मानसिक पीड़ा को दिखाता है।

मेडिकल जांच और पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट

त्विषा शर्मा का पहला पोस्टमार्टम एम्स भोपाल में किया गया था। डॉक्टरों ने शुरुआती तौर पर बताया कि मौत का कारण फांसी लगना प्रतीत होता है। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में त्विषा के शरीर पर कई चोटों का भी उल्लेख किया गया जिससे मामला और उलझ गया।

बाद की रिपोर्ट्स में कहा गया कि पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर कई एंटेमॉर्टम (मौत से पहले लगी) चोटें पाई गईं। साथ ही, टॉक्सिकोलॉजी और फॉरेंसिक जांच के लिए सैंपल सुरक्षित रखे गए। जांच एजेंसियां शरीर पर मौजूद कुंद वस्तु (blunt-force) से लगी चोटों की भी पड़ताल कर रही थीं।

इन्हीं चोटों के आधार पर परिवार ने दूसरी पोस्टमार्टम जांच की मांग तेज कर दी। सवाल उठने लगे कि क्या ये चोटें आत्महत्या के मामले से मेल खाती हैं या फिर मौत से पहले किसी हमले या मारपीट की ओर इशारा करती हैं।

पोस्टमार्टम के निष्कर्षों पर आपत्तियां

परिवार की तरफ से दायर याचिकाओं के बाद, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पहले पोस्टमार्टम के निष्कर्षों पर आपत्तियां उठाए जाने के बाद एम्स दिल्ली की एक एक्सपर्ट मेडिकल टीम द्वारा दूसरा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया।

जांच एजेंसियां शरीर पर मौजूद नुकीली चीजों (blunt-force) से लगी चोटों की भी जांच कर रही थीं। शरीर पर मिली इन चोटों ने ही परिवार की दूसरी पोस्टमार्टम की मांग को मजबूती दी। सवाल उठने लगे कि क्या ये चोटें आत्महत्या के मामले से मेल खाती हैं या फिर मौत से पहले किसी हमले या मारपीट की ओर इशारा करती हैं।

CBI जाांच की सिफारिश

15 मई को पुलिस ने समर्थ सिंह और उनकी मां गिरीबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु और उत्पीड़न से जुड़ी धाराओं में एफआईआर दर्ज की। इसके एक दिन बाद मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल सबूत, मोबाइल फोन रिकॉर्ड और आपसी बातचीत/मैसेज का विश्लेषण शुरू किया।

पुलिस ने ट्विशा की मौत से पहले के आखिरी घंटों की भी जांच की और घर के भीतर की गतिविधियों को दोबारा जोड़कर घटनाक्रम समझने की कोशिश की। जांच के दौरान समर्थ सिंह कई दिनों तक लापता रहे। बाद में पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना पर इनाम घोषित किया जिससे मामले पर सार्वजनिक ध्यान और बढ़ गया।

शुक्रवार को मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की। अब जांच एजेंसियां अस्पताल के रिकॉर्ड, काउंसलिंग दस्तावेज, व्हाट्सऐप चैट और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र जांच करेंगी। जांच का एक अहम हिस्सा कथित एमटीपी (Medical Termination of Pregnancy) यानी गर्भपात से जुड़े हालात और यह पता लगाना होगा कि क्या इसका ट्विशा की मानसिक स्थिति में आए किसी बदलाव से संबंध था।

पति समर्थ सिंह का सरेंडर

त्विषा की मौत के बाद लापता हुए समर्थ सिंह को शुक्रवार को भोपाल की एक अदालत में पेशी के बाद हिरासत में लिया गया। स्थानीय अदालत ने उसे पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। समर्थ की गिरफ्तारी को मामले में अहम प्रगति माना जा रहा है क्योंकि अब जांच एजेंसियां मुख्य आरोपी से सीधे पूछताछ कर पा रही हैं। साथ ही, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लैब फॉरेंसिक जांच के नतीजों का भी इंतजार किया जा रहा है जो मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

ससुराल पक्ष ने क्या कहा

त्विषा शर्मा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने दहेज उत्पीड़न के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, ”ये सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। जब हमने खुद उन्हें साढ़े सात लाख रुपये दिए थे तो हम दो लाख रुपये दहेज में क्यों मांगेंगे? इसका कोई मतलब ही नहीं बनता।”

उन्होंने पुलिस जांच की रफ्तार और दिशा पर भी सवाल उठाए। गिरिबाला सिंह ने कहा, ”मुझे लगता है कि पुलिस ने इन लोगों के दबाव और व्हाट्सऐप मैसेज व आरोपों के आधार पर जल्दबाजी में कार्रवाई की, जबकि इन बातों का कोई ठोस आधार नहीं है।”

एक अन्य बयान में उन्होंने कहा, ”हमारे वकील सब कुछ स्पष्ट करेंगे। अभी आरोप तय कहां हुए हैं? मामला अभी डिस्चार्ज स्टेज पर है।” आरोपी परिवार का लगातार कहना रहा कि यह मामला पुख्ता सबूतों से ज्यादा जनदबाव और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

अदालती कार्यवाही और दूसरी पोस्टमार्टम की मांग

जांच आगे बढ़ने के साथ मामला तेजी से अदालत तक पहुंच गया। गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई लेकिन भोपाल की एक सत्र अदालत ने समर्थ सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसी दौरान त्विषा के परिवार ने दूसरी पोस्टमार्टम की मांग और तेज कर दी। परिवार का कहना था कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं दे पाई।

बाद में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जल्द से जल्द दूसरा पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दिया। इसके बाद एम्स दिल्ली ने भोपाल में दूसरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया के लिए चार सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया। इस कदम को महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि इससे एक बाहरी मेडिकल पैनल को उस फॉरेंसिक विवाद में शामिल किया गया जो पहले से ही काफी संवेदनशील और विवादित बन चुका था।

दूसरी पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार

हाई कोर्ट के निर्देश और एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड की निगरानी में भोपाल में त्विषा शर्मा का दूसरा पोस्टमार्टम किया गया। त्विषा के पिता ने उम्मीद जताई कि दूसरी मेडिकल जांच उनकी बेटी की मौत के पीछे की सच्चाई सामने लाने में मदद करेगी।

दूसरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद भोपाल में त्विषा का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अब दूसरी ऑटोप्सी की रिपोर्ट को बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इसी के आधार पर तय होगा कि अभियोजन पक्ष मामले को मुख्य रूप से दहेज मृत्यु, आत्महत्या के लिए उकसाने या फिर संभावित हत्या से जुड़े आरोपों के रूप में आगे बढ़ाएगा।