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जब लालू यादव को गिरफ्तार करने के लिए सीबीआई ने मांगी थी सेना की मदद, फिर भी नहीं मिली थी सफलता

सीबीआई ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने की तैयारी की। लेकिन टीम यह भूल गई कि वह बिहार है। 90 के दशक का बिहार। जहां दबदबा केवल लालू यादव का ही था।

लालू प्रसाद यादव (फोटो सोर्स : Indian Express)

आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के एक मामले में सीबीआई के पसीने छूट गए थे। राज्य सरकार की पुलिस कथित तौर पर सीबीआई का सहयोग नहीं कर रही थी। तब जांच एजेंसी ने सेना की मदद ली थी। मामला करीब 22 साल पहले का है। इस घटना का गवाह न केवल बिहार बल्कि पूरा देश बना था। बात उस समय की है, जब लालू प्रसाद यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी अपनी पत्नी राबड़ी देवी के लिए छोड़ दी थी। इस बात को पांच दिन हो गए थे। उस वक्त केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई लालू को चारा घोटाले में गिरफ्तार करना चाह रही थी। लालू चारा घोटाले में मुख्य आरोपी बनाए गए थे। राज्य में लालू के दबदबे के चलते सीबीआई को शासन से मदद नहीं मिल पा रही थी। मामला बढ़ता ही जा रहा था। गंभीर परिस्थितियां देखते हुए जांच एजेंसी ने लालू को गिरफ्तार करने के लिए सेना से मदद मांगी।

चारा घोटाले की जांच कर रही सीबीआई टीम का नेतृत्व तत्कालीन सहायक निदेशक यू एन बिस्वास कर रहे थे। घोटाले की जांच के आधार पर बिस्बास ने लालू को गिरफ्तार करने की जरूरत समझी। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने की तैयारी भी की। लेकिन टीम यह भूल गई कि वह बिहार है। 90 के दशक का बिहार। जहां दबदबा केवल लालू यादव का ही था। मामला प्रदेश के मुखिया से जुड़ा होने के कारण राज्य के अधिकारियों ने हथियार डाल दिए।

सीबीआई ने 1997 में तत्कालीन बिहार के मुख्य सचिव बी पी वर्मा से संपर्क करना चाहा। लेकिन वर्मा के ऑफिस से कहा गया कि वह नहीं हैं। इसके बाद भी सीबीआई आगे बढ़ने के ही इरादे लिए रही। इसके बाद जांच एंजेसी ने उस समय के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एस के सक्सेना से मदद मांगी। तब सक्सेना ने कहा, उन्हें इसके लिए समय चाहिए होगा। मामले पर राज्य अधिकारियों से सामंजस्य न बैठ पाने के कारण यू एन बिस्बास ने सीबीआई के पटना स्थित कार्यलय में एक अधीक्षक रैंक के अधिकारी से कहा कि वह सेना से संपर्क करे और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने में उसकी मदद लें।

इतना होते ही मामला सीधा बिहार से दिल्ली पहुंच गया। उस वक्त के गृहमंत्री इंद्रजीत गुप्ता ने संसद को बताया कि पटना पहुंचे सीबीआई अधिकारियों ने मदद के लिए दानापुर कैंट के ऑफिसर इंचार्ज को पत्र लिखा है। पत्र में सीबीआई ने सेना से कम से कम एक कंपनी सशस्त्र बल तुरंत भेजने की मांग की थी। सीबीआई से मदद का पत्र मिलने के बाद दानापुर कैंट के ऑफिसर इंचार्ज ने तुरंत ही इस बारे में अपने अधिकारियों को बताया। इसके बाद सेना की तरफ से जवाब आया। सेना की तरफ से भी पहले निराशा ही हाथ लगी थी। सेना ने सीबीआई को उसके खत के जवाब में कहा, “केवल अधिसूचित नागरिक अधिकारियों के अनुरोध पर सहायता के लिए आ सकते हैं।”

सेना से भी तुरंत मदद न मिलने पर जांच एजेंसी ने सीबीआई कोर्ट का रुख किया। यहां से सीबीआई कोर्ट ने बिहार के डीजीपी के शोकॉज नोटिस जारी कर पूछा कि राज्य पुलिस से जांच एजेंसी को सहायता क्यों नहीं मिल पा रही है। हालांकि इसके बाद भी सीबीआई लालू यादव को गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। इस मामले में भले ही सीबीआई निराशा ही हाथ लगी हो लेकिन उस वक्त टीम को लीड करने वाले बिस्वास को दिलेरी दिखाने के लिए ‘इनाम’ भी मिला था। नौकरी ने रिटायर होकर वह अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल लौट गए। यहां ममता बनर्जी ने बिस्वास को मंत्री पद दिया। वह 2011 से 2016 तक मंत्री पद पर रहे।

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