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बीस भारतीय व्यंजनों को हासिल है जीआइ टैग, तिरुपति लड्डू, बीकानेरी भुजिया और धारवाड़ पेठा भी शामिल

राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा के सवाल पर यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दी।

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शुक्रवार को ‘मोदीएट20’ पुस्तक पर हस्ताक्षर करते प्रधानमंत्री मोदी साथ में सांसद राकेश सिन्हा।

हमारे देश में कई ऐसे उत्पाद हैं जो अन्य के मुकाबले कुछ अलग होते हैं और इसी से उनकी प्रतिष्ठा जुड़ी होती है। उदाहरण के लिए आंध्र के तिरुपति लड्डू, राजस्थान की बीकानेरी भुजिया, कर्नाटक का धारवाड़ पेठा आदि। ये सभी उत्पाद बिलकुल अलग तरह के हैं और इनकी प्रतिष्ठा भी पूरी दुनिया में हैं।

ऐसे ही विशेष उत्पादों की पहचान को बरकरार रखने के लिए इन्हें भौगोलिक संकेतक (जीआइ) टैग दिए जाते हैं। भारत में अब तक 420 उत्पादों को जीआइ टैग दिए जा चुके हैं जिनमें से 391 भारतीय और 29 विदेशी उत्पाद हैं। 20 भारतीय व्यंजनों को भी जीआइ टैग मिला हुआ है। राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा के सवाल पर यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दी।

सिन्हा ने सवाल पूछा था कि भारत में भौगोलिक संकेतक (जीआइ) टैग की कुल कितनी संख्या है? इसके राज्यवार संवितरण का ब्योरा क्या है? 2019-20 से 2021-22 तक इनमें से कितने टैग का पंजीकरण किया गया? सिन्हा के सवाल के उत्तर में मंत्री की ओर से बताया गया कि 27 जुलाई 2022 तक भौगोलिक संकेतक कार्यालय ने 420 उत्पादों को जीआइ आवेदन पंजीकृत किए हैं। इनमें से 391 भारतीय और 29 विदेशी उत्पाद हैं। 2019-20 से 2021-22 की अवधि के दौरान 77 जीआइ आवेदन पंजीकृत किए गए।

उन्होंने बताया कि भौगोलिक संकेतक पंजिका शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों के आधार पर जीआइ की सूची नहीं रखती है। इस सूची में आंध्र प्रदेश के तिरुपति लड्डू व बंदर लड्डू शामिल हैं। इसके अलावा बिहार का सिलाओ खाजा, गोवा के गोन खाजे, कर्नाटक का धारवाड़ पेठा, केरल का सेंट्रल त्रावणकोर गुड़ व मरयूर गुड़, मध्य प्रदेश का रतलामी सेव व झाबुआ कड़कनाथ ब्लैक चिकन मीट और महाराष्ट्र का कोल्हापुर गुड़ भी शामिल है।

इसी तरह सूची में ओड़ीशा का ओड़ीशा रसगुल्ला, राजस्थान की बीकानेरी भुजिया, तमिलनाडु का श्रीविल्लिपुत्तुर पल्कोवा, कोविलपट्टी कदलाई मिततई व पलानी पंचमीर्थम, तेलंगाना का हैदराबाद हलीम और पश्चिम बंगाल का बर्धमान सीताभोग, बर्धमान मिहिदाना, बांग्लार रसगुल्ला और जोयनगर मोआ शामिल हैं।

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