हर साल 2 करोड़ रोजगार का वादा याद कराया तो बीजेपी प्रवक्ता देने लगे सेल्फ इंप्लायमेंट की दुहाई, देखें

उन्होंने कहा, “बहुत से पद खाली हैं, लेकिन उसके पीछे स्थानीय स्तर पर क्षेत्रीय विवाद है। यूपी में शिक्षकों की भर्ती शुरू हुई है तो बहुत से लोग कोर्ट चले गए। इससे बार-बार नियुक्तियां टल जाती हैं। ऐसे में कई मुद्दे हैं, जो बाधा बनते हैं।”

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महामारी और पूर्णबंदी के कारण बहुत से लोगों का काम छिन गया और लोग बेरोजगार हो गए। फाइल फोटो।

बेरोजगारी और गरीबी देश के सामने बड़ी चुनौती है। सरकार दावा करती है कि रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। लेकिन आम लोगों का कहना है कि उन्हें कहीं रोजगार नहीं मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने 2014 में वादा किया था कि वह सत्ता में आई तो दो करोड़ रोजगार हर वर्ष देगी, लेकिन पिछले सात साल में इस वादे को भुला दिया गया। इसको लेकर टीवी चैनल न्यूज-24 पर डिबेट में कई तरह की बातें उठीं।

टीवी चैनल न्यूज-24 पर डिबेट में एंकर संदीप चौधरी ने बेरोजगारी का आंकड़ा देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल अग्रवाल से पूछा कि वह दो करोड़ रोजगार का क्या हुआ, क्या नौकरियां सरकार दे रही है? उन्होंने पूछा कि जब सरकार कहती है दो साल से अप्रत्याशित रूप से कोविड ने नुकसान पहुंचाया तो सरकार बताए कि जब कोविड नहीं थी यानी 2019 के पहले रोजगार के अवसर क्यों नहीं बढ़े। सरकार के आंकड़े ही बता रहे हैं कि रोजगार घटे और बहुत से पद अब भी खाली हैं, लेकिन वह भरे नहीं गए।

इस पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल अग्रवाल ने कहा, “बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। नौकरियां अगर आप सरकारी नौकरियों को ही मानते हैं तो यह संभव नहीं है। MSME में मुद्रा लोन देने की बात है और गैर सरकारी और असंगठित तौर पर भी काम मिलता है, वह भी रोजगार है। 37 किमी प्रतिदिन सड़क बनती है, वह भी रोजगार पैदा करती है।”

उन्होंने कहा, “बहुत से पद खाली हैं, लेकिन उसके पीछे स्थानीय स्तर पर क्षेत्रीय विवाद है। यूपी में शिक्षकों की भर्ती शुरू हुई है तो बहुत से लोग कोर्ट चले गए। इससे बार-बार नियुक्तियां टल जाती हैं। ऐसे में कई मुद्दे हैं, जो बाधा बनते हैं।”

बताया, “कोविड के दौरान नौकरियां खोने की स्थिति अप्रत्याशित थी। सरकार अपनी ओर राशन और बेरोजगारी भत्ता आदि देती है, लेकिन सरकार जानती है कि वह स्थायी हल नहीं है। इसीलिए नए-नए कौशल विकास की योजनाएं निकालती हैं, ताकि युवा उसे सीखकर स्वरोजगार कर सकें।”

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