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छी, छी-छी… डूब मरो चुल्लू भर पानी में- फर्जी गवाहों के मुद्दे पर शिवसेना पैनलिस्ट पर चीखने लगे अर्णब गोस्वामी, देखें फिर क्या हुआ

शिवसेना नेता विक्रम सिंह यह कहकर अपनी बात शुरू करते हैं कि आप इतने क्यों घबर गए अर्नब, आप इतने क्यों घबरा गए। अरे भाई मुंबई पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है तब भी आपको दिक्कत होती है।

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टीवी एंकर 9 पेनलिस्ट के साथ कहते हैं पहला सवाल विक्रम सिंह यादव अरे छी, छी, छी अरे फर्जी विटनेस छी, सुबह 3.30 बजे एक व्यक्ति विशेष के घर पर 12 पुलिस वाले पहुंचते हैं और फर्जी कागज दिखाते हैं और कहते हैं कि तुम रिपब्लिक के नाम पर गवाही दो। फिर टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी कहते हैं कि अरे डूब मरो चुल्लू भर पानी में कायर, डरपोक, झूठे मैंने बोला था पकड़े जाओगे, पकड़े गए कि नहीं बताओ मुझे। फिर कहते हैं कि पकड़ लिया मैंने बताओ, बताओ और यह कहते हुए एंकर चिल्लाने लगते हैं।

रिपब्लिक भारत टीवी चैनल के शो “पूछता है भारत” में पैनलिस्ट में आए शिवसेना नेता विक्रम सिंह यह कहकर अपनी बात शुरू करते हैं कि आप इतने क्यों घबर गए अर्नब, आप इतने क्यों घबरा गए। अरे भाई मुंबई पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है तब भी आपको दिक्कत होती है। और अब एफआईआर दर्ज, अरे भाई कुछ मामला होगा पुलिस का काम है छानबीन करना। इतने पर एंकर चीखने लगते हैं कि फर्जी गवाह क्यों बनाए, फर्जी गवाह क्यों बनाए। इस पर विक्रम सिंह एंकर से कहने लगते हैं कि आपको फर्जी लग रहा है तो कोर्ट में जाओ आप। झूठे हो आप।

इसके बाद बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी शिवसेना नेता विक्रम सिंह से कहते हैं कि अगर आपको लगता है कि मुंबई पुलिस का अपमान हुआ है और आपमें जरा भी गैरत है तो मुंबई पुलिस ने कहा था कि 26/11 का हमला हाफिज सईद ने कराया, करवाईये जाकर उसके खिलाफ एफआईआर जिसने कहा था कि 26/11 हाफिज सईद ने नहीं आरएसएस ने करवाया था। हिम्मत है तो जाकर करिए FIR। हैसियत नहीं वहां चूं बोलने की क्योंकि सरकार उसके दम पर टिकी है। शहीद हेमंत करकरे के बारे में जिसने कहा कि घटना से पहले मुझसे बात किया, करवाइये जाकर उसके खिलाफ एफआईआर।

पत्रकारों पर एफआईआर, रात के अंधेरे में जाकर गवाहों का बदलाव। देखिए एक बात और समझ लीजिए कि एफआईआर से राजनीति नहीं होती इंदिरा जी ने तो सारे लोगों को जेल में ही डाल दिया था उसके बाद भी बच गए क्या इसीलिए मैं कहता हूं कि लोकतंत्र के अर्थ को समझिए और 100 बातों की एक बात कि पुलिस इस आधार पर एफआईआर करने लगेगी तो जिन लोगों ने पुलिस के खिलाफ CAA, NRC में उल्टे सीधे बयान दिए उनके खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए कि नहीं।

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