दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि तुर्कमान गेट इलाके में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास पिछले महीने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई पथराव की घटना में केवल भीड़ का हिस्सा होने के आधार पर पुलिस राहगीरों को नहीं पकड़ सकती। न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने यह मौखिक टिप्पणी उस व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिस पर भीड़ को उकसाने का आरोप है।
अदालत ने साजिद इकबाल की अग्रिम जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से स्थिति रपट दाखिल करने को कहा और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की कथित भूमिका से संबंधित वीडियो साक्ष्य भी रिकार्ड पर लाए जाएं। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने कहा कि एजंसी मामले में साजिश की जांच कर रही है और आरोप है कि याचिकाकर्ता ने बैरिकेड हटाकर भीड़ को उकसाया। न्यायमूर्ति जालान को घटना का एक वीडियो दिखाया गया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से कहा कि वीडियो को उचित समय-चिह्न (टाइम स्टैम्प) के साथ रिकार्ड पर लाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि याचिकाकर्ता भीड़ का हिस्सा भी था, तो भी अशांति में उसकी विशिष्ट भूमिका पर विचार किया जाना आवश्यक है।
हाई कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि यदि वीडियो सामग्री से यह साबित होता है कि वह उकसा रहा है, तो आप सही हैं। यदि वह केवल वहां से गुजर रहा है, तो आप सही नहीं हैं। यदि आप उस इलाके में मौजूद हर व्यक्ति को उठा रहे हैं, तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध कर दी। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वह पथराव करने वाली भीड़ का हिस्सा नहीं था।
उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता अपने रिश्तेदार के घर से लौट रहा था, तभी उसे धक्का देकर भीड़ में धकेल दिया गया। निचली अदालत ने 21 जनवरी को याचिकाकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि जांच प्रारंभिक चरण में है।
अदालत ने यह भी कहा था कि एक वीडियो में वह भीड़ को इकट्ठा करता हुआ प्रतीत होता है और वहां मौजूद रहने तथा बैरिकेड हटाने का उसके पास कोई कारण नहीं था। यह मामला छह और सात जनवरी की मध्यरात्रि को रामलीला मैदान क्षेत्र में मस्जिद के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई गई थी कि तुर्कमान गेट के सामने स्थित मस्जिद को गिराया जा रहा है, जिसके बाद लोग वहां एकत्र हो गए थे। उन्होंने बताया कि करीब 150-200 लोगों ने पुलिस और नगर निगम के कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी, जिससे इलाके के थाना प्रभारी सहित छह पुलिसकर्मी घायल हो गए।
सात आरोपियों के लिए फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली की एक अदालत ने तुर्कमान गेट इलाके में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास पिछले महीने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई पथराव की घटना में सात आरोपियों की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मोहम्मद कैफ, मोहम्मद काशिफ, समीर हुसैन, मोहम्मद उबैदुल्लाह, मोहम्मद अरीब, मोहम्मद नावेद और मोहम्मद अथर की जमानत याचिका पर फैसला करने के अलावा अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भूपिंदर सिंह की अदालत सोमवार को अन्य पांच आरोपियों – अदनान, मोहम्मद इमरान, आमिर हमजा, मोहम्मद आदिल और मोहम्मद अदनान से संबंधित शेष दलीलों की भी सुनवाई करेगी। शुक्रवार को अदालत ने चारों आरोपियों कैफ, काशिफ, समीर और उबैदुल्लाह की दलीलें सुनीं।
कैफ और काशिफ के बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि दोनों भाइयों को सुबह करीब तीन बजकर 15 मिनट पर गिरफ्तार किया गया था, न कि ढाई बजे, जैसा कि जांच अधिकारी (आईओ) के जवाब में बताया गया है। डीके बसु दिशा-निर्देशों के अनुसार, पुलिस को गिरफ्तारी के आठ से बारह घंटे के भीतर गिरफ्तार व्यक्ति के परिजनों और कानूनी सहायता संगठन को सूचित करना अनिवार्य है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि ऐसी कोई सूचना दिये बगैर ही दोनों भाइयों को काफी समय पहले गिरफ्तार कर लिया गया था।
