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नरेंद्र मोदी सरकार के स्किल इंडिया मिशन की हकीकत: ट्रेनिंग सेंटर की जगह कहीं मिला मैरिज हॉल तो कहीं हॉस्टल

मंत्रालय की इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक सरकार द्वारा अनुदानित करीब 7 फीसदी संस्थान सिर्फ कागजों पर हैं। इनके अलावा 21 फीसदी संस्थानों के पास ट्रेनिंग के लिए बेसिक इक्वीपमेंट भी नहीं हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं में कौशल विकास करने, उन्हें हुनरमंद बनाने और उनके स्वरोजगार के लिए स्किल इंडिया अभियान की शुरुआत की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं में कौशल विकास करने, उन्हें हुनरमंद बनाने और उनके स्वरोजगार के लिए स्किल इंडिया अभियान की शुरुआत की थी। यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था मगर शुरुआती दौर में ही यह योजना फिसड्डी साबित हो रही है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक सात फीसदी संस्थान भूतों का अड्डा बन चुके हैं। यानी उन संस्थानों में किसी तरह का कौशल विकास प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। एनडीटीवी के मुताबिक देश भर में ऐसे सैकड़ों संस्थान हैं, जिसके नाम सरकारी वेबसाइट की लिस्ट में हैं लेकिन असलियत में वहां कोई ट्रेनिंग सेन्टर नहीं चल रहा है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत चलने वाले ऐसे अधिकांश ट्रेनिंग सेन्टर राजस्थान, यूपी और हरियाणा में हैं। एनडीटीवी की टीम जब दिल्ली से 60 किलोमीटर दूर एनसीआर के ग्रेटर नोएडा में ऐसे ही एक संस्थान का पता लगाने पहुंची तो वहां संस्थान था ही नहीं। वहां एक हॉस्टल चल रहा था, जबकि नेशनल स्किल डेवरपमेंट कॉरपोरेशन की वेबसाइट के मुताबिक वहां एसपीईजी नाम का कौशल विकास केन्द्र का संचालन हो रहा है और वहां 480 छात्रों को ब्यूटी और हेयरड्रेसिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है। जब हॉस्टल के गार्ड से इस बारे में पूछा गया तो उसने किसी तरह के ट्रेनिंग सेन्टर होने या किसी तरह का ट्रेनिंग कोर्स चलाए जाने से इनकार किया। गार्ड ने एनडीटीवी को बताया कि वहां मात्र एक ब्वॉयज हॉस्टल है।

एनडीटीवी ने सरकारी लिस्ट में शामिल यूपी के इटावा के जसवंत नगर में एक फुटवेयर डिजायन इन्स्टीच्यूट का भी हाल जाना। वहां पहुंचने पर पता चला कि वहां किसी प्रकार की ट्रेनिंग नहीं दी जा रही है बल्कि वहां एक वेडिंग हॉल है। जब कौशल विकास मंत्रालय के अधिकारियों को इस बावत बताया गया तो उनलोगों ने इस तरह के संस्थानों का नाम वेबसाइट की लिस्ट से हटाने की बात कही। अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय की इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक सरकार द्वारा अनुदानित करीब 7 फीसदी संस्थान सिर्फ कागजों पर हैं। इनके अलावा 21 फीसदी संस्थानों के पास ट्रेनिंग के लिए बेसिक इक्वीपमेंट भी नहीं हैं। हालांकि, अधिकारी इसके लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। बता दें कि क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ही इन्सपेक्शन और एक्रिडिएशन के लिए सिफारिश करती है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ल्‍ड यूथ स्किल डे के अवसर पर इस मिशन की शुरुआत की थी। इस मिशन के जरिए साल 2022 तक 40.2 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य सरकार ने रखा है। जिसमें 10.4 करोड़ युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर ट्रेंड किया जाएगा जबकि इसी अवधि तक 29.8 करोड़ मौजूदा वर्कफोर्स को अतिरिक्‍त स्किल ट्रेनिंग भी इसके तहत देने की योजना है।

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