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थर्ड फ्रंट के लिए ममता, मायावती और अखिलेश संग बैठक करेंगे TRS

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के एक बड़े नेता ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी क्षेत्रीय दलों का गैर कांग्रेसी, गैर भाजपा संघीय मोर्चा बनाने के विचार का प्रचार करने के लिए तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से संपर्क करेगी।

Author हैदराबाद | December 20, 2018 4:39 PM
पार्टी का घोषणापत्र तैयार करने के दौरान आपस में बात करते टीआरएस नेता। इस दौरान TRS सुप्रीमो के चंद्रशेखर भी मौजूद थे। (PHOTO SOURCE PTI)

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के एक बड़े नेता ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी क्षेत्रीय दलों का गैर कांग्रेसी, गैर भाजपा संघीय मोर्चा बनाने के विचार का प्रचार करने के लिए तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से संपर्क करेगी। लोकसभा में टीआरएस के उपनेता बी विनोद कुमार ने बताया कि उनकी पार्टी ने क्षेत्रीय दलों को पहले ही संयुक्त मोर्चे का ‘‘विचार दे दिया’’ है। उन्होंने कांग्रेस तथा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) खेमे के कुछ धड़ों की इस धारणा को खारिज कर दिया कि इस दिशा में टीआरएस अध्यक्ष तथा तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की कोशिशें भाजपा विरोधी वोटों को बांट सकती है और इससे भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुंच सकता है।

करीमनगर से लोकसभा सदस्य ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘इस संघीय मोर्चे पर हमारा विचार है : अपने-अपने राज्यों में शक्तिशाली सभी क्षेत्रीय दलों को एक साथ आना चाहिए और कांग्रेस या भाजपा के साथ हमारी मोलभाव की ताकत तभी बढ़ेगी जब हम एकजुट रहेंगे।’’ कुमार ने कहा, ‘‘वरना कांग्रेस या भाजपा प्रत्येक राज्य में हर राजनीतिक दल से मोल भाव करेंगे और अन्य क्षेत्रीय दलों पर अपनी शर्तें थोपेंगे।’’ उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय दलों को चुनाव के बाद राजनीतिक दलों के साथ संयुक्त रूप से मोलभाव करना चाहिए।

यह पूछे गया कि टीआरएस कैसे इस मुद्दे को आगे लेकर जाएगी क्योंकि ज्यादातर क्षेत्रीय दल या तो कांग्रेस के नेतृत्व वाले संप्रग की ओर झुके है या भाजपा के नेतृत्व वाले राजग की ओर झुके हैं। इस पर उन्होंने कहा, ‘‘हमने पहले ही यह विचार दे दिया है। जो भाजपा में है वे पहले ही इस पर विचार कर रहे हैं और संप्रग के साझेदार भी इस विचार से खुश हैं।’’ कुमार ने विस्तृत जानकारी दिए बगैर कहा, ‘‘कुछ दिन पहले ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी और मायावती ने खुद ही कांग्रेस से दूरी बना ली थी।’’ बनर्जी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और मायावती मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में क्रमश: कमलनाथ, अशोक गहलोत और भूपेश बघेल के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए थे।

बताया जा रहा है कि ये तीनों नेता प्रस्तावित भाजपा विरोधी मोर्चे का प्रधानमंत्री उम्मीदवार तय करने पर राजी नहीं हैं और उनका मानना है कि चुनाव के बाद नेतृत्व के मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है। बहरहाल, रविवार को द्रमुक प्रमुख ने विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का समर्थन किया।

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