वोटर्स को रिश्वत देने पर TRS सांसद कविता को 6 माह की कैद

टीआरएस सांसद इस मामले में दूसरी आरोपी हैं। पुलिस ने बताया कि यह मामला चुनाव अधिकारियों की शिकायत के बाद भद्राद्री कोठागुडेम जिले में बर्गमपहाड़ पुलिस ने दर्ज किया था।

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मलोथ कविता तेलंगाना के महबूबाबाद से सासंद हैं (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस,ट्विटर- @TrsKavitha)

तेलंगाना के महबूबाबाद से तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की सांसद मलोथ कविता को 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को रिश्वत देने के आरोप में एक स्थानीय अदालत ने शनिवार को छह महीने की कैद की सजा सुनाई। सांसदों/विधायकों से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत ने उन पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

टीआरएस सांसद इस मामले में दूसरी आरोपी हैं। पुलिस ने बताया कि यह मामला चुनाव अधिकारियों की शिकायत के बाद भद्राद्री कोठागुडेम जिले में बर्गमपहाड़ पुलिस ने दर्ज किया था। यह मामला उनके लिए वोट मांगने वाले पार्टी के एक कार्यकर्ता से संबंधित है। कविता ने पीटीआई-भाषा से कहा कि उन्हें जमानत मिल गई है और इस विषय पर उच्च न्यायालय में अपील करेंगी।

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, पुलिस ने अदालत में कहा कि चुनाव आयोग के एक उड़न दस्ते ने उसके सहयोगी शौकत अली को 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भद्राद्री-कोठागुडेम जिले में निवासियों के बीच 500-500 रुपये बांट कर कविता के पक्ष में वोट देने की अपील करते हुए देखा था।

इधर दिल्ली उच्च न्यायालय वर्तमान कोविड-19 महामारी के दौरान एलोपैथी के बारे में कथित रूप से दुष्प्रचार करने को लेकर योगगुरु रामदेव के विरूद्ध सात चिकित्सक संघों द्वारा दायर की गयी अर्जी पर सोमवार को सुनवाई करेगा। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति सी हरिशंकर करेंगे, जिन्होंने चिकित्सक संघों से कथित दुष्प्रचार से जुड़ा वीडियो पेश करने को कहा था।

जो चिकित्सक संघ अदालत पहुंचे हैं, उनमें ऋषिकेश, पटना और भुवेनश्वर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों के रेसीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, चंडीगढ़ के स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के एसोसिएशन ऑफ रेसीडेंट डॉक्टर्स, यूनियन ऑफ रेसीडेंट डॉक्टर्स ऑफ पंजाब, मेरठ के लाला लाजपत राय स्मारक चिकित्सा महाविद्यालय के रेसीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन एवं हैदराबाद के तेलंगाना जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि रामदेव यह बात कहकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं कि एलोपैथी कोविड-19 के कई मरीजों की मौत के लिए जिम्मेदार है और यह धारणा पैदा कर रहे हैं कि एलोपैथी डॉक्टर के हाथों लोगों की जान जा रही है।

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