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Birthday Special: वाम किले को भेद पहली बार त्रिपुरा में खिलाया था कमल, बयानों के लेकर अक्सर विवादों में रहते हैं सीएम बिप्लब कुमार देब

त्रिपुरा के सीएम बिप्लब कुमार देब का जन्म 25 नवंबर 1971 को हुआ था, त्रिपुरा में 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा को जीत दिलाकर वाम दलों का 22 साल का राज खत्म किया था।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: November 25, 2020 1:29 PM
tripura government crisis tripura bjp governmentत्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब। (Source: BjpBiplab/Twitter)

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने बीते कुछ सालों में कई राज्यों में बड़े नेताओं को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई है। ज्यादातर हिंदी भाषी राज्यों में सरकार बनाने के साथ भाजपा ने पिछले छह सालों में पूर्वोत्तर के राज्यों में भी बड़ी बढ़त बनाई है। इनमें असम एक महत्वपूर्ण राज्य रहा है। हालांकि, अगर भाजपा की इस क्षेत्र में सबसे बड़ी सफलता की बात करें, तो वह रही थी 2018 में त्रिपुरा की जीत, जब पार्टी ने लेफ्ट पार्टियों के 22 साल के मजबूत किले त्रिपुरा में पहली बार जीत का झंडा फहराया। इस जीत के बाद भाजपा में जमीनी स्तर पर काम करने वाले प्रदेशाध्यक्ष बिप्लब कुमार देब ने सीधे अर्श तक का सफर तय किया और राज्य के सीएम बने।

बिप्लब कुमार देब ने त्रिपुरा में भाजपा को किस तरह खड़ा किया, यह जानना कुछ कम दिलचस्प नहीं है। दरअसल, 2013 के चुनाव में लेफ्ट पार्टियों ने चुनाव में सीधा क्लीन स्वीप किया था। तब भाजपा को राज्य में सिर्फ 1.5 फीसदी वोट मिले थे, जबकि सीट एक भी नहीं आई थी। इसके बाद पार्टी ने संगठन स्तर पर बड़े बदलाव किए और 2015 में महासंपर्क अभियान के तौर पर बिप्लब कुमार देब को प्रदेश संयोजक के तौर पर त्रिपुरा भेजा गया। यूं तो उस वक्त बिप्लब कुमार देब को नया नेता माना जा रहा था, पर एक साल से भी कम समय में उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर प्रदेशाध्यक्ष का पद हासिल किया।

बिप्लब कुमार का उदय किस तेजी से हुआ, इसका उदाहरण इसी बात से मिलता है कि बिप्लब कुमार देब 21 साल पहले त्रिपुरा में अपने पुरखों का घर छोड़कर दिल्ली चले गए थे। यहां उन्होंने भाजपा संगठन में काम किया और फिर पार्टी का भरोसा हासिल किया। इसी का नतीजा था कि लेफ्ट पार्टियों का लालकिला कहे जाने वाले त्रिपुरा में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए भाजपा ने उन्हें चुना। चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए देब ने पार्टी को 43 फीसदी से ज्यादा वोट दिलाए और पहली बार त्रिपुरा में भाजपा की सरकार की नींव रख दी।

विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं बिप्लब देब: त्रिपुरा सीएम बनने के बाद से बिप्लब कुमार देब ने अब तक कई ऐसे बयान दिए हैं, जिन पर विवाद हो चुका है। उन्होंने कहा था कि इंटरनेट की खोज महाभारत काल में हुई थी। अपनी बात पर तर्क प्रस्तुत करते हुए देब ने कहा था कि महाभारत का युद्ध सैटेलाइट के जरिए लाइव देखा जा रहा था। इसके सबूत में उन्होंने संजय द्वारा धृतराष्ट्र को महाभारत युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाने की घटना का जिक्र किया था। तब इस बयान का काफी मजाक उड़ा था।

इसके बाद बिप्लब कुमार देब ने एक बयान में ब्यूटी पेजेंट्स पर ही सवाल उठा दिए थे। उन्होंने कहा था कि 21 साल पहले डायना हेडन मिस वर्ल्ड खिताब जीतने के लायक नहीं थीं। उन्होंने ऐश्वर्या राय की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा था कि वह सही मायने में भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने माफी मांग ली।

त्रिपुरा सीएम ने इसके बाद बेरोजगार युवाओं को पान की दुकान खोलने की नसीहत दे डाली थी। उन्होंने कहा था कि ‘युवा कई सालों तक राजनीतिक दलों के पीछे सरकारी नौकरी के लिए पड़े रहते हैं। लेकिन मेरा ये कहना है कि अगर वह इतनी भागदौड़ छोड़कर पान की दुकान खोल लें तो बैंक खाते में अब तक पांच लाख रुपए जमा होते।’ उन्होंने आगे कहा था- “भागने से अच्छा है कि प्रधानमंत्री के मुद्रा योजना के तहत बैंक से लोन लेकर पशु संसाधन क्षेत्र के विभिन्न परियोजनाओं को शुरू करके स्वयं रोजगार का सृजन करें।”

कुछ समय पहले ही उन्होंने पंजाबियों और जाटों को लेकर विवादास्पद बयान दे दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर हम पंजाब के लोगों के बारे में बात करते हैं, तो हम कहते हैं, वह एक पंजाबी, एक सरदार है। सरदार किसी से डरते नहीं हैं। वे बहुत मजबूत हैं, लेकिन उनके पास कम दिमाग है। कोई भी उन्हें ताकत से नहीं बल्कि प्यार और स्नेह से जीत सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं आपको हरियाणा के जाटों के बारे में बताता हूं। वे कहते हैं कि जाट कम बुद्धिमान हैं, लेकिन शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। यदि आप एक जाट को चुनौती देते हैं, तो वह घर से अपनी बंदूक ले आएगा

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