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त्रिपुरा गंवाने के बाद सीपीएम ने ’45 प्रतिशत वोटों’ के लिए दिया धन्यवाद, बीजेपी पर मढ़ा ये आरोप

सीपीआई ने त्रिपुरा विधानसभा चुनावों के दौरान धन-बल का प्रयोग करने पर भाजपा की आलोचना भी की। सीपीआई ने कहा कि भाजपा ने चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए भारी मात्रा में धन और अन्य स्त्रोतों का इस्तेमाल किया।

हेमंत बिस्वा सरमा ने मानिक सरकार पर तंज कसते हुए सलाह दी कि अब वह केरल, पश्चिम बंगाल या बांग्लादेश जा सकते हैं। (image source – Express photo)

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के नतीजे तकरीबन आ चुके हैं। 60 सीटों वाले त्रिपुरा में भाजपा 43 सीटों जीत चुकी है। वहीं लेफ्ट के हिस्से में 16 सीटें आयी हैं। नतीजों को देखते हुए यह तय हो गया है कि त्रिपुरा में 25 साल बाद वामपंथियों का किला ढह गया है और वहां बहुमत से भाजपा की सरकार बनने जा रही है। वामपंथियों ने भी अपनी हार स्वीकार कर ली है और त्रिपुरा की जनता को 45 प्रतिशत वोट देने के लिए धन्यवाद दिया है। कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि त्रिपुरा की जनता के जनादेश के बाद राज्य में भाजपा और IPFT के गठबंधन वाली सरकार बनने जा रही है। 25 साल सत्ता में रहने के बाद, वामपंथियों की हार हुई है।

सीपीआई ने त्रिपुरा विधानसभा चुनावों के दौरान धन-बल का प्रयोग करने पर भाजपा की आलोचना भी की। सीपीआई ने कहा कि भाजपा ने चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए भारी मात्रा में धन और अन्य स्त्रोतों का इस्तेमाल किया। पार्टी ने कहा कि भाजपा सभी एंटी-लेफ्ट वोटों को अपने साथ जोड़ने में सफल रही। इसके साथ ही पोलित ब्यूरो ने त्रिपुरा की जनता को 45 प्रतिशत वोट देने के लिए धन्यवाद भी दिया।

साथ ही पार्टी ने कहा कि वह लोगों को विश्वास दिलाते हैं कि उनकी पार्टी राज्य के सभी वर्गों के मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी। इसके साथ ही पार्टी आदिवासी और अन्य लोगों के बीच एकता के लिए भी प्रयास जारी रखेगी। त्रिपुरा में भाजपा की जीत के बाद अब सीएम कैंडिडेट के लिए माथापच्ची शुरु हो गई है। सीएम पद के लिए फिलहाल दो नेताओं का नाम उभरकर आए हैं। ये नेता हैं बिपल्ब कुमार देब और सुनील देवधर। 48 साल के बिपल्ब कुमार देब जब आज से 15 साल पहले दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिए आए थे तो यहां पर वह जिम इंस्ट्रक्टर के तौर पर काम भी कर चुके हैं। 2016 में जब उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाकर त्रिपुरा भेजा गया तो उनका ‘लोकल चेहरा’ होना उनके पक्ष में गया। हिन्दुस्तान टाइम्स ने बीजेपी के एक महासचिव के हवाले से कहा है कि बीजेपी में भी उनकी स्वीकार्यता है और सीएम पद के वे प्रथम दावेदार हैं।

वहीं सुनील देवधर भी सीएम पद के लिए मजबूत उम्मीदवार हैं। सुनील को 2014 में त्रिपुरा का प्रभारी बनाकर भेजा गया था। उसके बाद से सुनील ने राज्य में भाजपा का जनाधार बनाने में खासी मेहनत की है।

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