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तीन तलाक अध्‍यादेश: पांच राज्‍यों के चुनाव में फायदा उठा सकती है बीजेपी, ये रहे पांच संकेत

एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब 14 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। सीएसडीएस के मुताबिक इनमें से करीब 8 फीसदी ने 2014 के चुनावों में बीजेपी को वोट दिया था।

ट्रिपल तलाक पर केबिनेट का फैसला

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार (19 सितंबर) को एक साथ तीन तलाक देने को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इसके तहत दोषी शख्स को तीन साल तक की जेल हो सकती है। हालांकि, अभी अध्यादेश पर राष्ट्रपति का हस्ताक्षर होना बाकी है। बीजेपी को उम्मीद है कि राष्ट्रपति जल्द ही इसे लागू करने की मंजूरी देंगे। बीजेपी लंबे समय से तीन तलाक को लेकर सक्रिय रही है। पार्टी को उम्मीद है कि तीन तलाक पर लाया गया अध्यादेश उसके लिए आगामी पांच राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम) की विधान सभा चुनावों में बैतरणी पार कराने जैसा काम करेगी क्योंकि इससे मुस्लिम महिलाएं खुश हैं। इससे भी ज्यादा उम्मीद अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में हैं।

छह महीने की वैधता: राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ यह अध्यादेश छह महीने के लिए वैध होगा। उसके बाद या पहले सरकार को तीन तलाक पर बिल संसद से पास कराना होगा। बिल पास न करा पाने की स्थिति में मोदी सरकार अध्यादेश दोबारा ला सकती है। दोनों ही सूरत में इसका फायदा बीजेपी उठाना चाहती है। अगर सितंबर के आखिरी हफ्ते से भी यह अध्यादेश लागू हुआ तो वह मार्च के आखिरी हफ्ते तक प्रभावी रह सकता है। इस बीच शीतकालीन सत्र में सरकार कोशिश करेगी कि फिर से बिल संसद में पास हो, जिसकी संभावना नहीं के बराबर है। ऐसी सूरत में बीजेपी विपक्षी कांग्रेस और अन्य पार्टियों पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाकर अप्रैल-मई में चुनाव प्रचार करेगी। अगर सरकार ने दोबारा अध्यादेश लाया तब भी सरकार मुस्लिम महिलाओं की हितैषी होने का दावा चुनावी रैलियों में करेगी साथ ही विपक्षी कांग्रेस पर लिंग भेद, लैंगिक असमानता, सामाजिक गैर बराबरी को बढ़ावा देने का आरोप लगाएगी।

मुस्लिम वोट बैंक दो फाड़ करने की कोशिश: बीजेपी तीन तलाक के जरिए मुस्लिम वोट बैंक में दो फाड़ करना चाहती है। एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब 14 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। सीएसडीएस के मुताबिक इनमें से करीब 8 फीसदी ने 2014 के चुनावों में बीजेपी को वोट दिया था लेकिन तब मुद्दा अलग था। अब तीन तलाक के मुद्दे पर माना जा रहा है कि मुस्लिम महिलाएं यानी उसका करीब 7 फीसदी बीजेपी को वोट दे सकती हैं। वैसे परंपरागत तौर पर मुस्लिमों को कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों का समर्थक माना जाता रहा है लेकिन बीजेपी उस धारणा को बदलने की जुगत में लगी हुई है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के साथ ही तेलंगाना में भी मुस्लिम आबादी अच्छी है और किसी भी राजनीतिक दल की जीत-हार में अहम भूमिका निभाती है।

मुस्लिमों पर मोदी मेहरबान: हालिया घटनाक्रम देखें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाव-भाव भी मुसलमानों को लेकर बदले हैं। पिछले दिनों इंदौर के दाउदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के कार्यक्रम में न केवल पीएम शरीक हुए बल्कि उनकी भावनाओं को देखते हुए सैफी मस्जिद में नंगे पैर पहुंचे। वहां उन्होंने मुस्लिम धर्मगुरुओं को गले भी लगाया। उनकी चादर भी ओढ़ी और लंबे वक्त तक उसे ओढ़े रहे। मस्जिद में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बोहरा समुदाय के समाजिक योगदान की तारीफ करते हुए कहा कि इस समुदाय ने राष्ट्रभक्ति की मिसाल पेश की है। उन्होंने बोहरा समुदाय की तारीफ करते हुए कहा कि बोहरा समाज के साथ उनका रिश्ता पुराना है। इससे एक साल पहले मोदी सितंबर 2017 में गुजरात के एक मस्जिद में जापानी पीएम के साथ पहुंचे थे।

संघ का मुस्लिम तुष्टिकरण: 2019 चुनावों के नजदीक आते ही संघ भी मुस्लिम तुष्टिकरण में जुटा है। तीन दिनों तक नई दिल्ली में लेक्चर सीरीज में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने साफ किया कि हिन्दुत्व मुस्लिम विरोधी नहीं है। उन्होंने तीनों दिन यह बात दोहराई कि संघ विविधता में एकता वाली भारतीय संस्कृति का पालन करता है और विश्व बंधुत्व का हिमायती है। उन्होंने कहा कि बिना मुस्लिमों के हिन्दुत्व नहीं बच सकता। संघ ने इस कार्यक्रम में कई मुस्लिम हस्तियों को बी बुलाया था। फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दिकी को मोहन भागवत ने बगल की सीट पर बैठाया था। यानी संघ एक तरह से मुस्लिमों को तुष्ट करने और उन्हें यह संदेश देने की कोशिश करता रहा कि न तो संघ और न ही बीजेपी मुस्लिम विरोधी है। माना जाता है कि आगामी चुनावों में मुस्लिम संभवत: बीजेपी के खिलाफ वोट करें।

कांग्रेस की धार कुंद करने की कोशिश: मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को प्रो मुस्लिम पार्टी माना जाता रहा है और बीजेपी उसके इस एजेंडे का खुलकर विरोध करती रही है। बीजेपी कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप भी लगाती रही है लेकिन पिछले दो विधान सभा चुनावों के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए सॉफ्ट हिन्दुत्व की राह अपनाई है। कांग्रेस के इस स्टैंड से बीजेपी खेमे में बेचैनी महसूस की जा रही है। लिहाजा, बीजेपी ने भी सॉफ्ट मुस्लिमवाद की तरफ सेफ जोन में कदम बढ़ाया है और इसके लिए पहला हथियार तीन तलाक को बनाया है। बीजेपी को उम्मीद है कि इस कोशिश से वह कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में न केवल सेंधमारी कर पाएगी बल्कि कांग्रेस को मौकापरस्त और मुस्लिम महिला विरोधी भी ठहरा सकेगी।

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