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फौरी तीन तलाक पर अध्‍यादेश से AIMPLB नाखुश, खटखटा सकता है अदालत का दरवाजा

AIMPLB ने फौरी तीन तलाक को अपराध मानने का व‍िरोध किया है, मगर इस मुद्दे पर बोर्ड में मतभेद हैं। लखनऊ में वर्किंग कमेटी की बैठक में यह बात सामने भी आ गई जब 51 में से केवल 19 सदस्‍य ही हाजिर हुए।

मुंबई में तीन तलाक पर अध्‍यादेश के खिलाफ प्रदर्शन करते मुस्लिम समाज के लोग। (Photo : PTI)

फौरी तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाले अध्‍यादेश पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की कानूनी समिति विचार करेगी। अगले कुछ दिनों में बैठक कर, इस बारे में आगे की तैयारी पर चर्चा होगी। इकॉनमिक टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड के कुछ सदस्‍य अध्‍यादेश में ‘आपराधिक धारा’ के खिलाफ अदालत जाने के पक्ष में हैं। AIMPLB के एक सदस्‍य कासिम रसूल इलियास ने अखबार से कहा, ”जिस तरह से इसे अपराध बनाया गया है, उससे अदालत जाने की जरूरत पैदा हो गई है। हम जल्‍द ही तय करेंगे कि यह कैसे करना है।” कासिम ने कहा, ”अध्‍यादेश की संभावना थी क्‍योंकि हमें लगा था कि सरकार राज्‍यसभा से विधेयक पास होने का इंतजार नहीं करना चाहती। यह सिर्फ मुद्दे से ध्‍यान भटकाने के लिए किया गया है।”

AIMPLB महासचिव वली रहमानी ने अखबार से कहा कि बोर्ड सदस्‍य अध्‍यादेश का अध्‍ययन करने के बाद बैठक बुलाएंगे। AIMPLB ने फौरी तीन तलाक को अपराध मानने का व‍िरोध किया है, मगर इस मुद्दे पर बोर्ड में मतभेद हैं। लखनऊ में वर्किंग कमेटी की बैठक में यह बात सामने भी आ गई जब 51 में से केवल 19 सदस्‍य ही हाजिर हुए। बोर्ड के एक और सदस्‍य महमूद प्राचा ने कहा कि अध्‍यादेश में महिलाओं को संपत्ति का अधिकार नहीं दिया गया है तथा तीन साल बेहद ‘हल्‍की सजा’ है।

महमूद के अनुसार, ”(अध्‍यादेश में) गिरफ्तारी का कोई डर नहीं है। एक अध्‍यादेश की उम्र छह महीने होती है। ऐसा नहीं कि बीजेपी के पास (राज्‍यसभा में बिल पास कराने को) संख्‍या नहीं । हमने राज्‍यसभा के उपसभापति चुनाव में देखा था। यह सिर्फ राजनैतिक फायदे के लिए किया जा रहा है, महिलाओं को कुछ देने के लिए नहीं।”

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अध्यादेश से मुस्लिम महिलाओं के साथ और अन्याय होगा। अध्यादेश को महिला-विरोधी बताते हुए उन्होंने कहा कि यह संविधान के अंतर्गत दिए गए मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है। हैदराबाद के सांसद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक पर अपने फैसले में कहा था कि अगर एक व्यक्ति तीन तलाक कहता है तो शादी निरस्त नहीं होगी। उन्होंने कहा, “तो फिर आप किसके लिए उसे सजा देना चाहते हो?”

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) ने अध्यादेश का स्वागत किया। संगठन ने एक बयान में कहा, “यह सही होता अगर संसद के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से इस विधेयक को पास किया होता, खासकर तब जब वास्तविक विधेयक में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। यह बहुप्रतीक्षित और अत्यधिक वांछनीय कानून है।”

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