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तीन तलाक: मुस्लिम महिला ने चीफ जस्टिस को खून से लिखा खत, कहा- इंसाफ दें या मरने की इजाजत

महिला की शादी साल 2011 में हुई थी। उसकी एक चार साल की बेटी भी है। महिला ने बताया कि उसके पति ने तीन बार तलाक-तलाक कहकर तलाक दे दिया और मुझे और मेरी बच्ची को छोड़ दिया।
Author नई दिल्ली। | November 30, 2016 21:21 pm
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर कोई पति एक बार में तीन तलाक बोलता है, तो अब विवाह समाप्त नहीं होगा। (Photo Source: Twitter)

ट्रिपल तलाक के विरोध में मध्य प्रदेश के देवास की रहने वाली एक मुस्लिम महिला ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर को खून से पत्र लिखकर इंसाफ मांगा है। महिला ने सीजेआई से मांग की है कि या तो इंसाफ दिया जाए या फिर मरने की इजाजत दी जाए। महिला का नाम शबाना है। महिला का आरोप है कि नर्सिंग का कोर्स करने के बाद वह नौकरी करना चाहती है। लेकिन उसका पति चाहता था कि वह खेतों में काम करे। मना करने पर मारपीट करता था और दहेज के लिए भी प्रताड़ित भी किया। महिला ने बताया कि उसके पति टीपू ने दूसरी शादी कर ली है।

दैनिक भास्कर के मुताबिक शबनम ने सीजेआई को लिखी चिट्ठी में ऐसे कानून को खत्म करने की मांग की है, जिससे उसकी और उनकी चार साल की बेटी की जिंदगी बर्बाद होती है। वहीं, महिला के पति टीपू शाह ने बताया कि पत्नी शबाना घर में ठीक से नहीं रहती थी। शबाना हमेशा नौकरी कराने की बात करती थी पर यह तो फैमिली ही तय करेगी कि महिला को बाहर नौकरी कराना है या नहीं। उसने यह भी कहा कि शबाना से उसने इस्लामिक रीति-रिवाजों से तलाक लिया है।

महिला की शादी साल 2011 में हुई थी। उसकी एक चार साल की बेटी भी है। महिला ने बताया कि उसके पति ने तीन बार तलाक-तलाक कहकर तलाक दे दिया और मुझे और मेरी बच्ची को छोड़ दिया। महिला ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखे अपने पत्र में कहा कि मैं तीन तलाक के सख्त खिलाफ हूं, अब मुझे देश का जो कानून हैं, जो सबके लिए समान है, इस कानून के तहत न्याय मिले। ऐसे पर्सनल लॉ को मैं नहीं मानती, जिससे मेरी और मेरी बेटी का भविष्य खराब हो गया। मुझे अपने देश के कानून पर पूरा विश्वास है, कि मुझे और मेरी जैसी और कई बहन-बेटियों को न्याय मिले। यह मेरी लड़ाई और मेरी बच्ची और ऐसे कई बच्चों की हैं, जिन्हें इस तरह से छोड़ दिया जाता हैं।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से की महिलाएं ट्रिपल तलाक का विरोध कर रही हैं। गाजियाबाद की एक मुस्लिम महिला ने ट्रिपल तलाक के चलते हिंदू धर्म अपनाने का फैसला किया था। महिला के पति ने ट्रिपल तलाक के बाद उसे वेश्यावृत्ति के लिए दबाव डाल रहा था। महिला ने बताया कि उसके पति ने उसे तलाक दे दिया था। बाद में निकाह हलाला के तहत उसकने अपने दोस्त के पास भेजा। तीन महीने बाद जब वह वापस लौटी तो उसका पति अपनाने से इनकार करते हुए महिला को वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर करने लगा।

 

 

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