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तीन तलाक पर मायावती ने पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा- शरीयत में बदलाव की घटिया राजनीति मत करें

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि भाजपा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संकीर्ण, साम्प्रदायिक व कट्टरवादी एजेण्डे को किसी-न-किसी रुप में देश के लोगों के ऊपर थोपने में लगी हुई है।

Author October 25, 2016 8:54 PM
बसपा सुप्रीमो मायावती। (फाइल फोटो)

बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार (25 अक्टूबर) को भाजपा व केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह प्रदेश व कुछ अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा के चुनाव के मददेनजर तीन तलाक एवं एक समान नागरिक संहिता जैसे शरीयत से जुड़े धार्मिक मुद्दों को लेकर नया विवाद खड़ा कर रही है जो कि अति-निन्दनीय है। मायावती ने एक बयान में कहा कि जब से केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है तबसे भाजपा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संकीर्ण, साम्प्रदायिक व कट्टरवादी एजेण्डे को किसी-न-किसी रुप में देश के लोगों के ऊपर थोपने में लगी हुई है। उन्होंने कहा, ‘ताजा विवाद में मुस्लिम पर्सनल ला व तीन तलाक के शरीयत से सम्बंधित मुद्दे तथा अत्यन्त ही संवेदनशील कामन सिविल कोड (एक समान नागरिक संहिता) के मसले को छेड़ दिया गया है। इससे पहले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान होने का दर्जा छीन कर एक सुलझे हुये मामले को दोबारा से शुरू कर विवाद पैदा कर दिया है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुस्लिम और उनके शरियत में बीजेपी और प्रधानमंत्री का पड़ना देश हित में नहीं है। वह भी ऐसे वक्त में जब चुनाव आने वाले हैं।’

वीडियो: तीन तलाक के मुद्दे पर गर्माई सियासत; मायावती बोली- “अपने विचार और फैसले किसी पर न थोपें मोदी”

नरेंद्र मोदी की सरकार ने मुस्लिम पर्सनल ला तीन तलाक तथा कामन सिविल कोड आदि के मुद्दों को लेकर नया विवाद खड़ा करके इसकी आड़ में भी घिनौनी राजनीति शुरू कर दी है, जिसकी बीएसपी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। मायावती ने कहा कि बेहतर होगा कि किसी धर्म से जुड़े सवाल पर उस धर्म को मानने वाले लोगों को ही तय करने दिया जाये और मुस्लिम पर्सनल ला व तीन तलाक एवं समान नागरिक संहिता आदि के मामले को भी इसी नजरिये से देखा जाना ही उचित व न्यायोचित प्रतीत होता है।

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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्‍तर प्रदेश के महोबा में रैली के दौरान तीन तलाक का मुद्दा उठाया था। उन्‍होंने कहा कि तीन तलाक को लेकर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। मोदी ने कहा था, ‘क्‍या एक व्‍यक्ति का फोन पर तीन बार तलाक कहना और एक मुस्लिम महिला का जीवन बर्बाद हो जाना सही है? इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।’ उन्‍होंने इस मामले में राजनेताओं और टीवी बहस में शामिल होने वाले लोगों की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के बयान महिलाओं को उनके अधिकारों से दूर करते हैं। तीन तलाक को राजनीतिक और साम्प्रदायिक मुद्दा बनाने के बजाय कुरान के ज्ञाताओं को बैठाकर इस पर सार्थक चर्चा करवाएं। मोदी ने ‘परिवर्तन रैली’ में आरोप लगाया कि तीन तलाक के मुद्दे पर देश की कुछ पार्टियां वोट बैंक की भूख में 21वीं सदी में मुस्लिम औरतों से अन्याय करने पर तुली हैं। क्या मुसलमान बहनों को समानता का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।

बता दें कि ‘तीन तलाक’ का मुद्दा उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। सरकार ने अपने हलफनामे में इसका विरोध किया है, जबकि ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे शरिया कानून में दखलअंदाजी मानते हुए पूरे देश में हस्ताक्षर अभियान चलाया है।

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