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अराजक व हिंसक राजनीति को बढ़ावा दे रही है तृणमूल कांग्रेस: बसु

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में बदले हालात में एक तरफ सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस व दूसरी तरफ भाजपा के हमलों के मद्देनजर विरोधी वाममोर्चा ने सभी वामदलों को एक मंच पर लाने की योजना बनाई है। इसी मकसद से अक्तबूर के आखिर में या नवंबर की शुरुआत में महानगर कोलकाता में एक सम्मेलन का किया जाएगा। वाममोर्चा […]

Author Published on: September 30, 2014 9:46 AM

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में बदले हालात में एक तरफ सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस व दूसरी तरफ भाजपा के हमलों के मद्देनजर विरोधी वाममोर्चा ने सभी वामदलों को एक मंच पर लाने की योजना बनाई है। इसी मकसद से अक्तबूर के आखिर में या नवंबर की शुरुआत में महानगर कोलकाता में एक सम्मेलन का किया जाएगा। वाममोर्चा का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस जहां राज्य में अराजक व हिंसक राजनीति को प्र्रश्रय दे रही है, वहीं भाजपा के बढ़ते असर से यहां सांप्रदायिक तनाव फैलने का खतरा है। लिहाजा इन दोनों राजनीतिक ताकतों से मुकाबला करने के लिए सभी वामपंथी दलों को एकजुट करने की सख्त जरूरत है।

पिछले एक सितंबर को वाममोर्चा की ओर से साम्राज्यवाद के खिलाफ निकाली गई शांति रैली में जिस तरह से एसयूसीआइ व कई नक्सली राजनीतिक दलों ने इसमें खुल कर हिस्सा लिया था, उससे आने वाले समय में तृणमूल व भाजपा के खिलाफ इन दलों को एक मंच पर लाना भी समय की जरूरत है। इसके लिए मोर्चा ने शहर में एक सम्मेलन बुलाने का फैसला किया है। सोमवार को राज्य वाममोर्चा की बैठक में यह फैसला किया गया। बैठक के बाद आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में वाममोर्चा के चेयरमैन व माकपा के राज्य सचिव विमान बसु ने यह जानकारी पत्रकारों को दी।

बसु ने बताया कि वाममोर्चा के बाहर जो वामपंथी दल हैं, उनको लेकर एक सितंबर को महानगर में एक विशाल जुलूस निकाला गया था, जो बेहद सफल रहा। वह जुलूस युद्ध विरोधी व साम्राज्यवाद के खिलाफ था। इसी मकसद से अक्तूबर के अंत में या नवंबर की शुरुआत में हम सम्मेलन आयोजित करेंगे, जिसमें सभी वामदलों को एकजुट करने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने वामपंथी दलों का आह्वान करते हुए कहा- हमारे सामने बड़े सांप्रदायिक खतरे दिख रहे हैं। हमें मिलकर इस खतरे का मुकाबला करना होगा। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक एकता की रक्षा के लिए सभी वामपंथी दलों को एकजुट करने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि एक सितंबर की युद्ध विरोधी रैली के अनुभव से सीख लेकर हमने ऐसा करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह से सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने विरोधी विहीन परिस्थिति पैदा करने के लिए कमर कस ली है, वैसे में वामपंथी दलों की एकजुटता और भी जरूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि युद्ध विरोधी रैली में ही एसयूसीआइ न नक्सलपंथी दलों के नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा था कि राज्य में लोकतंत्र की रक्षा के लिए विभिन्न मुद्दों पर हम सबको मिल कर लड़ना होगा।
बसु ने राज्यवासियों को विभाजनकारी लोगों से सतर्क रहने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि आगामी छह अक्तबूर को बकरीद व सात अक्तूबर को लक्ष्मी पूजा है। इन दोनों उत्सवों को सामने रख कर कुछ दुष्ट लोग उकसाने वाले बयान भी दे सकते हैं। ऐसे में सभी लोगों को इसके प्रति सावधान व सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि शारदीय उत्सव के बाद वाममोर्चा की ओर से राज्य के सभी जिलों में जोरदार आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस आंदोलन में लोगों की ज्वलंत समस्याओं के हल व चिटफंड के खिलाफ प्रचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस राज्य में भी भाजपा का प्रभाव बढ़ रहा है। साथ ही तृणमूल कांग्रेस की सरकार लोगों की समस्याओं का हल नहीं कर पा रही है। ऐसे में वामपंथी दलों को लोगों को जागरूक करने में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।

वाम नेता ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में शासक पार्टी तृणमूल कांग्रेस के समर्थक माकपा सहित विभिन्न विरोधी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं व समर्थकों पर हमले कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों को सिर्फ वाममोर्चा ही रोक सकता है और इसके लिए एक वृहत्तर वाम एकता तैयार करना जरूरी है।

 

 

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