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Budget 2018 India : एंटी करप्शन वॉच डॉग की रिपोर्टः भारत से कहीं ज्यादा पारदर्शी बजट बनाता है बांग्लादेश

भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी दल ने कहा है कि भारत के बजट में बहुत कम पारदर्शिता है। इसमें नागरिकों की भागीदारी अधिक सुनिश्चित कराने की जरूरत है। भारत से कहीं अधिक पारदर्शी बजट तो बांग्लादेश बनाता है।

Author नई दिल्ली | February 1, 2018 1:20 PM
वित्त मंत्री अरुण जेटली( फाइल फोटो)

भारत का बजट कम पारदर्शी है । इससे कहीं अधिक पारदर्शिता बांग्लादेश के बजट में है। यह कहना है भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी दल ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल इंडिया (TII) का। संस्था का कहना है कि भारत के बजट की ऐसी प्रक्रिया है कि आम आदमी के बीच बहुत कम सूचनाएं पहुंच पातीं हैं। जबकि नागरिकों की भागीदारी इसमें ज्यादा होनी चाहिए। जब तक नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी तो देश को गंभीर आर्थिक और वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के मुताबिक – ” सामान्य नागरिकों, विशेषज्ञों और गैर विशेषज्ञों के लिए बजट बहुत समझदार दस्तावेजों में से एक होता है । मगर जिस ढंग से भारत में बजट बनता है, उसमें नागरिक नीतियों को सार्वजनिक नीति बनाने की कोई झलक नहीं दिखती है। यह ध्यान देने योग्य है कि बजट पारदर्शिता पर अंतरराष्ट्रीय मानक के मापदंडों पर, भारतीय बजट को कम पारदर्शी माना जाता है। क्योंकि यह पब्लिक डोमेन में सीमित बजट प्रदान करता है । ”
बता दें 2017 के ओपेन बजट सर्वे में भारत ने सौ में से 48 अंक हासिल किए । संस्था ने यह सर्वे बजट की प्रक्रिया और वित्तीय उत्तरदायित्व में सरकार के स्तर से पारदर्शिता की पहल और हर पृष्ठिभूमि के लोगों से बातचीत के आधार पर ग्लोबल लेवर पर तैयार की। रिपोर्ट का मकसद रहा कि भारत की बजट प्रक्रिया में मौजूद अपर्याप्तता और अंतराल को उजागर कर सुधार की तरफ इशारा करना है।
भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी दल ने कहा- विश्व की शक्तिशाली देशों के बजट में बेहतर पारदर्शिता है । इस प्रकार राष्ट्र को आशाजनक लोकतंत्र के रूप में उभरने की जरूरत है। बांग्लादेश की प्रणाली में भारत से कहीं ज्यादा पारदर्शिता है। संस्था ने कहा कि बजट की जानकारी सिर्फ विशेषज्ञों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि यह लोकतांत्रिक नियमों के उल्लंघन के साथ भ्रष्टाचार और गंभीर आर्थिक वित्तीय समस्याओं की ओर जाता है । संस्था ने यह भी कहा कि अहम समय है कि जब कुल बजट राजस्व, व्यय, लेखा-परीक्षा रिपोर्ट को जनता आसानी से समझे, क्योंकि दस्तावेज सिर्फ सरकारी इस्तेमाल के लिए नहीं होते। ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल ने कहा कि भारत के बजट में सार्वजनिक भागीदारी समाचार दर्शकोंकी तुलना में अधिक नहीं है। जबकि वास्तविक व्यय पर विधायिका का निरीक्षण बहुत सीमित है। भारत में बजट काफी जटिल प्रणाली और प्रक्रिया के चलते विशिष्ट डोमेन है।

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