भारतीय रेलवे की एसी बोगियों में यात्रियों को दी जाने वाली चादर, कंबल और तकिए के कवर जैसी लिनेन सामग्री लगातार गायब हो रही थी। शुरुआत में यह सामान्य बात लगती रही, लेकिन जब द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में आंकड़े सामने आए तो पता चला कि पिछले चार वर्षों में करीब 1.27 करोड़ (चादर, कंबल, तकिए के कवर आदि) लिनेन आइटम चोरी हो चुके हैं। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद मामला रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव तक पहुंचा। उन्होंने तुरंत अधिकारियों से इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने को कहा।

मंगलवार को रेलवे की ’52 हफ्तों में 52 सुधार’ पहल पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैष्णव ने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले का जिक्र किया और पूछा कि इस समस्या का समाधान कब तक किया जाएगा। इस पर अधिकारियों ने कहा कि वे दो महीने के भीतर इस चोरी को रोकने के लिए एक ठोस व्यवस्था (योजना) तैयार कर देंगे।

1.27 करोड़ बेडरोल चोरी

सोमवार को द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया कि कोरोना महामारी के बाद जब ट्रेनों में बेडरोल सर्विस पूरी तरह फिर से शुरू हुई तो जनवरी 2022 से लेकर मई 2026 तक भारतीय रेलवे की एसी बोगियों से कम से कम 1.27 करोड़ बेडरोल के सामान चोरी हो चुके हैं।

एक लिनेन बेडरोल में आमतौर पर दो चादरें, एक कंबल, एक तकिया, एक तकिए का कवर और एक फेस टॉवल शामिल होता है।

यह जानकारी रेलवे के सभी 69 मंडलों में दायर आरटीआई (सूचना का अधिकार) आवेदनों के जरिए जुटाई गई। इनमें से 16 रेलवे जोनों के 54 मंडलों से जवाब मिले। इन आंकड़ों से पता चला कि 2022 से 2025 के बीच बेडरोल चोरी की घटनाओं में 56% की बढ़ोतरी हुई है।

जांच में यह भी सामने आया कि पिछले चार वर्षों में बेडरोल की चोरी के कारण ठेकेदारों को करीब 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ठेकेदारों के यहां काम करने वाले कोच अटेंडेंट्स का कहना है कि इस नुकसान की भरपाई के लिए अक्सर उनकी तनख्वाह से पैसे काट लिए जाते हैं।

मंगलवार को रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए रेलवे कई नए उपायों और विकल्पों पर विचार कर रहा है ताकि बेडरोल की चोरी पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सके।

’52 हफ्तों में 52 सुधार’ योजना का हिस्सा

रेलवे इस बात पर भी विचार कर रहा है कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को ऐसे यात्रियों को गिरफ्तार करने का अधिकार दिया जाए जो बेडरोल या लिनेन चोरी करते पकड़े जाएं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह कदम रेलवे की ’52 हफ्तों में 52 सुधार’ योजना का हिस्सा हो सकता है। इस पहल की शुरुआत साल की शुरुआत में रेलवे की व्यवस्था और कामकाज में बड़े सुधार लाने के लिए की गई थी।

अधिकारी ने कहा, ”यह समस्या काफी जटिल है और इसके समाधान के लिए व्यापक स्तर पर चर्चा करनी होगी। ऐसे यात्रियों का पता लगाना आसान नहीं होता। हमें ऐसे कदम उठाने होंगे, जिससे लोग चोरी करने से बचें। एक तरीका यह हो सकता है कि आरपीएफ को ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार करने का अधिकार दिया जाए। इसके अलावा, अगर कोई यात्री लिनेन वापस नहीं करता और उस पर शक हो तो आरपीएफ को उसके सामान की तलाशी लेने का अधिकार भी दिया जा सकता है।”

रेलवे संपत्ति (गैरकानूनी कब्जा) अधिनियम के तहत रेलवे के तौलिया, चादर या कंबल की चोरी गैर-जमानती अपराध मानी जाती है।

सितंबर 2015 में रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिया था कि लिनेन बांटने वाले कर्मचारी यात्रियों से कहें कि वे ट्रेन से उतरने से कम से कम 30 मिनट पहले इस्तेमाल किया हुआ बेडरोल वापस कर दें।
इसके अलावा, बार-बार ऐसा करने वाले यात्रियों पर नजर रखने, उन्हें समझाने, कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और जरूरत पड़ने पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए थे।

फिलहाल, रेलवे के अलग-अलग मंडलों में बेडरोल चोरी रोकने के लिए सबसे ज्यादा जोर बेडरोल अटेंडेंट्स को सतर्क रहने पर दिया जाता है। उन्हें लिनेन पर लगातार नजर रखने, समय रहते उसे वापस इकट्ठा करने और ड्यूटी के दौरान पूरी तरह चौकन्ना रहने की सलाह दी जाती है।

दिल्ली मंडल में सबसे ज्यादा फेस टॉवल चोरी 

रेल मंडलचोरी हुए फेस टॉवलकुल चोरी में हिस्सेदारी
दिल्ली4.78 लाख58%
रांची3.88 लाख42%
मुंबई3.57 लाख44%
दानापुर3.37 लाख59%
अहमदाबाद3.22 लाख46%
जयपुर2.52 लाख56%

सोनपुर और बिलासपुर मंडल में सबसे ज्यादा पिलो कवर चोरी 

रेल मंडलचोरी हुए पिलो कवरकुल चोरी में हिस्सेदारी
सोनपुर1.58 लाख39%
बिलासपुर1.55 लाख34%

इन मंडलों में हुई सबसे ज्यादा चोरी

रेल मंडलचोरी हुए आइटम की संख्याबढ़ोतरी (%)
दानापुर78,09591%
धनबाद55,90691%
रांची77,33245%
जोधपुर94,67946%