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व्यापारियों ने किया जीएसटी दरों का विरोध

केंद्र सरकार की ओर से लागू किए जाने वाले माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की प्रस्तावित दरों को लेकर कई व्यापारियों ने नाराजगी शुरू कर दी है।

Author नई दिल्ली | June 2, 2017 1:10 AM
1 जुलाई, 2017 से देश में जीएसटी लागू कर दिया गया है। (Photo-financialexpres)

केंद्र सरकार की ओर से लागू किए जाने वाले माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की प्रस्तावित दरों को लेकर कई व्यापारियों ने नाराजगी शुरू कर दी है। देशभर में मार्बल (पत्थर) का धंधा करने वाले अपने व्यापार पर जीएसटी की दरों को बढ़ाने को लेकर काफी नाराज हैं। केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव के विरोध में उन्होंने अपने काम धंधे बंद कर दिए हैं। मार्बल व्यापारी तीन दिन के लिए जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि उनके धंधे पर 28 फीसद की दर से कर लगाया गया तो न केवल उनके व्यापार पर उसका असर पड़ेगा, बल्कि नए मकानों की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी।

दिल्ली मार्बल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार ने अपने बजट में मार्बल और ग्रेनाइट व्यवसाय पर वैट की दर को 12.5 फीसद से 5 फीसद किया था जिससे दिल्ली सरकार को मार्बल व्यवसाय से पहले से ज्यादा राजस्व की प्राप्ति हुई। केंद्र सरकार की जीएसटी कमेटी ने मार्बल और ग्रेनाइट को विलासिता की वस्तु श्रेणी में रखा है, जबकि मौजूदा समय में हर श्रेणी का परिवार अपने घर में मार्बल और ग्रेनाइट लगाने का सपना देखता है। उन्होंने बताया कि 95 फीसद से ज्यादा पत्थर बचने वाले पूरे देश में छोटे धंधे की श्रेणी में आते हैं। ये व्यवसाय एक्साइज ड्यूटी के तहत नहीं आता है। राजस्थान जो मार्बल, ग्रेनाइट व नेचुरल स्टोन का प्रमुख उत्पादक राज्य है, वहां पर राज्य सरकार को वैट ड्यूटी 260 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष है और एक्साइज ड्यूटी मात्र 8.50 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष है।

एसोसिएशन के महासचिव घनश्याम सारदा के मुताबिक मार्बल, ग्रेनाइट और अन्य पत्थर व्यवसाय देश में कृषि और कपड़ा उद्योग के बाद तीसरा सबसे ज्यादा रोजगार मुहैया करवाने वाला व्यवसाय है। इस व्यवसाय से दिल्ली व अन्य राज्यों के करीब पांच करोड़ लोगों का जीवन निर्वाह हो रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी कमेटी की प्रस्तावित 28 फीसद की दर दिल्ली राज्य की 5 फीसद दर से 5 गुणा से भी ज्यादा है। एसोसिएशन का कहना है कि जीएसटी कमेटी उनके व्यवसाय पर कर की दर 5 फीसद से बढ़ाकर 12 फीसद भी कर दे तो उन्हें एतराज नहीं है।

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