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‘खुदरा व्यापार में करोड़ों का घाटा’

केवल 20 फीसद कर्मचारियों के साथ ही देश भर के व्यापारी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला को जारी रखें हुए है। बंदी के चलते देश भर में करीब 3.15 लाख करोड़ रुपए के फुटकर व्यापार प्रभावित हुआ है।

Author नोएडा | April 15, 2020 3:59 AM
COVID 19 lockdownकोरोना वायरस के चलते जारी लॉकडाउन के दौरान सुनसान पड़ा मुंबई का मशहूर जुहू बीच इलाका। (पीटीआई फोटो)

देश के व्यापारियों के शीर्ष संगठन अखिल भारतीय व्यापारी संघ (कैट) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश में देशबंदी लागू रखने के निर्णय को तार्किक एवं बेहद जरूरी बताते हुए इसका पुरजोर समर्थन किया। हालांकि व्यापार जगत को विगत 21 दिनों में देशबंदी के चलते बड़ी आर्थिक हानि व नुकसान भी उठाना पड़ा है।

कैट के दिल्ली एनसीआर संयोजक और नोएडा निवासी सुशील कुमार जैन ने बताया कि देश में गत 21 दिनों की बंदी के चलते करीब 3.15 लाख करोड़ रुपए का फुटकर व्यापार प्रभावित हुआ है। बताया गया है कि देश में लगभग सात करोड़ व्यापारी हैं। जिनमें से करीब डेढ़ करोड़ व्यापारी आवश्यक वस्तुओं का व्यापार करते हैं। लेकिन उनमें से केवल 40 लाख ही देश भर में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति श्रंखला को जारी रखे हुए हैं। केंद्र सरकार के स्पष्ट दिशा निदेर्शों के बावजूद राज्यों में अभी तक ट्रांसपोर्ट सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। करीब 80 फीसद कर्मचारी बंदी के चलते अपने गांवों को चले गए हैं।

केवल 20 फीसद कर्मचारियों के साथ ही देश भर के व्यापारी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला को जारी रखें हुए है। बंदी के चलते देश भर में करीब 3.15 लाख करोड़ रुपए के फुटकर व्यापार प्रभावित हुआ है। सुशील कुमार जैन ने आग्रह किया है की सभी राज्यों में व्यापारियों को कर्फ्यू पास सुविधापूर्वक दिलाने और पर्याप्त मात्रा में ट्रांसपोर्ट सुविधा आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध सप्लाई की बेहद जरूरी है। राज्यों के स्तर पर यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

हर महीने 1500 करोड़ रुपए के राजस्व की चपत
कोविड-19 को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने भले ही देशबंदी की सीमा को बढ़ाकर 3 मई कर दिया है लेकिन 21 दिन की बंदी में ही नोएडा, ग्रेटर नोएडा के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पूरी तरह से धराशायी हो गए हैं। जिले में संचालित 16 हजार औद्योगिक इकाइयों में करीब 25 हजार करोड़ रुपए का कारोबार बंदी की भेंट चढ़ चुका है। इससे सरकार को करीब 1500 करोड़ रुपये के राजस्व की चपत लग चुकी है।

इस स्थिति को खुद वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के मासिक राजस्व के आंकड़े बयां कर रहे हैं। इससे पूरे औद्योगिक सेक्टरों ही नहीं, बल्कि सरकारी विभागों में भी हाहाकार मचा हुआ है।इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव राजीव बंसल के मुताबिक केवल जीएसटी के आंकड़ों को आधार मान लिया जाए, तो नोएडा में हर महीने करीब 1500 करोड़ रुपये राजस्व के रूप में सरकार को मिलते हैं। यह राजस्व तभी मिलता है, जब 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया गया हो।

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