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केंद्र की राष्ट्रविरोधी नीतियों के खिलाफ होगा आंदोलन

माम मजदूर संगठनों ने मिलकर शनिवार को एलान किया कि मोदी सरकार की जनविरोधी, कामगार विरोधी व राष्ट्रविरोधी नीतियों के खिलाफ जनवरी से आंदोलन शुरू किया जाएगा।

Author नई दिल्ली | November 12, 2017 2:38 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- एएनआई ट्विटर)

मनाही के बावजूद संसद मार्ग पहुंच कर देश भर से आए किसानों, मजदूरों और कामगारों ने चेतावनी दी ‘मोदी जी देश को दूसरी गुलामी बर्दाश्त नहीं’। देश में सबका विकास, अच्छे दिन या मेक इन इंडिया सरीखे जुमले अब और नहीं चलेंगे। तमाम मजदूर संगठनों ने मिलकर शनिवार को एलान किया कि मोदी सरकार की जनविरोधी, कामगार विरोधी व राष्ट्रविरोधी नीतियों के खिलाफ जनवरी से आंदोलन शुरू किया जाएगा। इंटक, एटक, सीटू, ऐटक, एचएमएस और एक्टू सहित तामाम मजदूर संगठनों ने तीन दिन के महापड़ाव के बाद साझे मंच से एलान किया कि निजीकरण के खिलाफ देश भर में सेक्टर स्तर पर हड़ताल की जाएगी। इसके लिए श्रमिकों का आह्वान किया गया। बजट सत्र में संसद मार्च किया जाएगा। एटक नेता अमरजीत कौर ने कहा कि देश ने देखा है कि कैसे एक कंपनी ईस्ट इंडिया आई और देश में कंपनी राज कायम हो गया। इसके बाद धीरे से विक्टोरिया राज और इस तरह से देश 200 साल की गुलामी झेलने क ो अभिशप्त हो गया था जिसके खिलाफ 100 बरस लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। इसलिए आज हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देना चाहते हैं कि देश को एक और गुलामी मंजूर नहीं है क्योंकि जिस तरह से वे देश विरोधी कदम उठा रहे हैं व विदेशी कंपनियों को देश के प्राकृतिक संसाधन सौंपते जा रहे हैं, वह हमें एक और गुलामी की ओर धकेल रहा है।

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उन्होंने कहा कि अमेरिका के इशारे पर सारे फैसले किए जा रहे हैं और सवाल पूछने वाले को देशद्रोही करार दे दिया जाता है। अमरजीत कौर ने यह भी कहा कि राष्ट्रविरोधी काम खुद मोदी सरकार कर रही है जबकि इसके खिलाफ बोलने वाले को राष्ट्रविरोधी कह दिया जाता है। यह सब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। देश की आवाम जाग उठी है। इस महारैली में आई महिलाओं ने दिखा दिया कि हम डरने वाले नहीं हैं। सीटू से तपन सेन ने कहा कि देश में अब झूठे जुमले नहीं चेलेंगे। निजीकरण, ठेकेदारी और मेकइन इंडिया के नाम पर सब कुछ निजी कंपनियों को हवाले किया जा रहा है। गुजरात मॉडल की बात होती है लेकिन गुजरात से आई महिलाओं ने बताया कि वहीं कमजोर और मजदूर तबका त्राहि-त्राहि कर रहा है। देश के किसान तबाह हैं। हिंद मजदूर संगठन से हरभजन सिंह ने रेलवे की दुर्दशा के बारे में बताया कि किस तरह से देश के सबसे  बड़े रेल  नेटवर्क को तोड़ने और इसे  निजी कंपनियों को बेचने की कोशिश की जा रही है।

 

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