Mohan Bhagwat News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भगवत ने शनिवार को कहा कि भारत की ट्रेड डील उसकी शर्तों और नियमों के आधार पर होनी चाहिए, ना किसी के दबाव में। भगवत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर साइन करने के करीब पहुंच रहा है।

आरएसएस की शताब्दी के समारोह में भागवत ने कहा, “हम खुद को दुनिया से अलग नहीं कर सकते, लेकिन समझौता हमारी शर्तों और नियमों के अनुसार होना चाहिए। हम किसी के दबाव में या टैरिफ देखकर ऐसा नहीं करेंगे।” किसी राष्ट्र या नेता का नाम लिए बिना, भगवत ने कहा, “हम सभी देख रहे हैं कि महाशक्ति क्या कर रही है। हम ऐसी महाशक्ति नहीं बनना चाहते जो दूसरों को डराए। विश्वगुरु के रूप में, हम भीतर से नेतृत्व करना चाहते हैं और दुनिया के लिए एक उदाहरण बनना चाहते हैं। हम ऐसी महाशक्ति बनने की आकांक्षा नहीं रखते जो दूसरों को डराए। बल्कि, हम एक ऐसे विश्वगुरु बनना चाहते हैं जिसे विश्व स्तर पर स्वीकार किया जाए और अपनाया जाए।”

हमारी अपनी भाषाएं हैं- मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने कहा, “हम भारत हैं। हमारी अपनी भाषाएं हैं, अपना पहनावा है। कम से कम अपने घरों की चारदीवारी के भीतर, हमारी भाषा, कपड़े, प्रार्थनाएं, खाना, घर और यात्रा हमारी अपनी होनी चाहिए। किसी डॉक्यूमेंट पर आपके साइन किसी विदेशी भाषा में होने की जरूरत नहीं है। आप अपनी मातृभाषा में साइन कर सकते हैं।”

मोहन भागवत ने आगे कहा, मम्मी-डैडी ही क्यों? क्या “माताजी-पिताजी” संभव नहीं है? घर में हमारे धर्म के अनुसार पूजा-अर्चना का स्थान होना चाहिए। हमें बाहर कुछ खास कपड़े पहनने पड़ते हैं। लेकिन हम धोती भी नहीं बांध सकते।” आरएसएस प्रमुख ने कहा, “जो ईसाई हैं, उनके घरों में ईसा मसीह की तस्वीरें होनी चाहिए। कृष्ण भक्तों के घरों में कृष्ण की तस्वीरें होनी चाहिए। क्या हमें अपने घरों में विवेकानंद की तस्वीरें रखनी चाहिए? क्या हमें अपने घरों में तिलक, गांधी, सावरकर और अंबेडकर की तस्वीरें रखनी चाहिए? माइकल जैक्सन की ही क्यों? ऐसा होता है। फिर यात्रा की बात आती है। यात्रा की बात करें तो, दुनिया देखना अच्छी बात है। लेकिन कभी चित्तौड़गढ़ जाइए, कभी रायगढ़ देखिए। भाषा, पहनावा, भक्ति गीत, भोजन, घर, यात्रा – ये सब हमारे अपने घर का हिस्सा होने चाहिए। इससे आत्म-पहचान का भाव जागृत होता है।”

हमारे सामने कई चुनौतियां हैं- मोहन भागवत

आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा, “सभी को सक्रिय रहने की जरूरत है, समय की यही मांग है और हमारे सामने कई चुनौतियां हैं। विश्व में स्वार्थी और एकाधिकारवादी ताकतें भारत के उत्थान को रोकने के लिए काम कर रही हैं। अगर पूरा हिंदू समाज एकजुट हो जाए, तो कोई भी इसकी न्यायपूर्ण शक्ति का सामना नहीं कर पाएगा। उनके दिन गिने-चुने हैं। अब यह केवल इच्छाशक्ति की लड़ाई है। अगर हम अपना काम जारी रखें, अपने देश का निर्माण करें और उनके हमलों से खुद को बचाएं, तो उनकी शक्ति स्वाभाविक रूप से कम हो जाएगी।” बता दें कि संघ प्रमुख ने कहा कि कई लोगों को लगता ​​है कि नरेन्द्र मोदी आरएसएस की वजह से प्रधानमंत्री हैं, लेकिन मोदी भले ही एक राजनीतिक दल का नेतृत्व करते हैं और आरएसएस के कई स्वयंसेवक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। पढ़ें पूरी खबर…