गढ़चिरौली में मारे गए नक्सलियों में खूंखार कमांडर मिलिंद तेलतुंबड़े भी, जानें कौन था 50 लाख का इनामी

मुठभेड़ के बारे में जानकारी देते हुए महाराष्ट्र सरकार के गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने कहा कि मारे गए कुल 26 नक्सलियों में 20 पुरुष नक्सली और 6 महिलाएं हैं।

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हुए मुठभेड़ में 50 लाख का इनामी नक्सली मिलिंद तेलतुंबड़े भी मारा गया। (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में शनिवार को पुलिस के साथ मुठभेड़ में 26 नक्सलियों को मार गिराया गया। मारे गए नक्सलियों में खूंखार कमांडर मिलिंद तेलतुंबड़े भी शामिल है। जिसपर 50 लाख का इनाम रखा गया था। मिलिंद तेलतुंबड़े भीमा कोरेगांव मामले में जेल में बंद आनंद तेलतुंबड़े का भाई है। 

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को गढ़चिरौली में हुए मुठभेड़ की जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि शनिवार को सी-60 पुलिस कमांडो दल ने सुबह कोर्ची के मर्दिनटोला वन क्षेत्र में तलाश अभियान शुरू किया था, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई। मुठभेड़ के बाद सी-60 कमांडो ने घटनास्थल से 26 नक्सलियों के शव बरामद किए। मुठभेड़ के बारे में जानकारी देते हुए महाराष्ट्र सरकार के गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने कहा कि मारे गए कुल 26 नक्सलियों में 20 पुरुष नक्सली और 6 महिलाएं हैं।

राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मिलिंद तेलतुंबड़े के मारे जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि मारे गए नक्सलियों में वह भी शामिल है। पुलिस ने मारे गए नक्सलियों के पास से भारी संख्या में हथियार भी बरामद किया है। पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि मुठभेड़ में चार पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हो गए। पहले घायल पुलिसकर्मियों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद घायलों को बेहतर उपचार के लिए हेलीकॉप्टर से नागपुर ले जाया गया। 

मुठभेड़ में मारा गया नक्सली मिलिंद तेलतुंबड़े पर भीमा कोरेगांव हिंसा में भी शामिल होने का आरोप था। उसकी पत्नी भी नक्सलियों के गिरोह में शामिल थी। मिलिंद तेलतुंबड़े सीपीआई माओवादी के महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश ज़ोन का प्रमुख था। उसे दीपक के नाम से भी जाना जाता था। साल 1980 में अपने मैनेजर से झगड़ा होने के बाद वह नक्सली संगठनों में शामिल हो गया था।

नक्सली बनने से पहले वह चंद्रपुर के वेस्टर्न कोलफिल्ड में आईटीआई की ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद बतौर टेक्नीशियन काम करता था। उस दौरान भी वह कामगार यूनियन में काफी सक्रिय था। वह सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य भी था। मूल रूप से महाराष्ट्र के यवतमाल का रहने वाला मिलिंद काफी नक्सली घटनाओं में शामिल था। पुलिस को काफी समय से उसकी तलाश थी और उसके ऊपर 50 लाख का इनाम भी रखा गया था।

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