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शीर्ष अदालत की टिप्पणी हाथरस की घटना भयानक, मामले की जांच सुचारू रूप से होने की जताई उम्मीद

मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े की अध्यक्षता वाले एक पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को यह कदम उठाया। पीठ में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रह्मण्यम भी थे।

Supreme Court Judge virtual hearingहाथरस घटना पर शीर्ष अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

हाथरस में दलित लड़की के साथ हुई दरिंदगी को सुप्रीम कोर्ट ने असाधारण, भयानक और चौंकाने वाली घटना बताया। अदालत ने भरोसा दिया कि मामले की जांच सुचारू रूप से होगी। अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर बुधवार तक हलफनामे के द्वारा पीड़ित परिवार और मामले के गवाहों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा देने को कहा है। साथ ही सरकार यह भी बताए कि पीड़ित परिवार को वकील उपलब्ध है या नहीं। मामले की सुनवाई अब अगले हफ्ते होगी।

मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े की अध्यक्षता वाले एक पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को यह कदम उठाया। पीठ में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रह्मण्यम भी थे। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से मामले की जांच सीबीआइ को सौंपने की सहमति जताई गई। साथ ही दलील दी गई कि राजनीतिक कारणों से इस घटना के बारे में तरह-तरह की झूठी कहानियां प्रचारित की जा रही हैं, इसलिए राज्य सरकार खुद चाहती है कि जांच सीबीआइ करे।

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से यह सफाई महान्यायवादी तुषार मेहता ने दी। उन्होंने कहा कि तरह-तरह की झूठी कहानियों के प्रसारण पर विराम लगना चाहिए। सीबीआइ जांच से बदनीयती के कारण झूठी कहानियां रचने के निहित स्वार्थी तत्वों के मंसूबों पर रोक लगेगी। राज्य सरकार ने यहां तक कह दिया कि सीबीआइ जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जा सकती है। इस दलित युवती के साथ अगड़ी जाति के उसी इलाके के चार लड़कों ने 14 सितंबर को बलात्कार के बाद जानलेवा हमला किया था। लड़की की बाद में इलाज के दौरान दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में 29 सितंबर को मौत हो गई।

सामाजिक कार्यकर्ता सत्यामा दुबे ने पर इस मामले में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में मामले की जांच सीबीआइ या एसआईटी से कराने का अनुरोध किया गया है। अदालत ने पहले याचिकाकर्ता से सवाल किया कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट क्यों नहीं गईं। दुबे की वकील कीर्ति सिंह ने जवाब दिया कि वे मामले को दूसरे राज्य में स्थानांतरित कराना चाहते हैं। इस पर पीठ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट इसकी सुनवाई पहले ही कर रहा हैै। हाईकोर्ट की राय आने दीजिए। अगर हाईकोर्ट चूक करेगा तो हम देखेंगे। हम सुनिश्चित करेंगे कि जांच सुचारू रूप से हो।

इस लड़की का शव उसके परिवारजनों को सौंपने के बजाय उसकी अंत्येष्टि आधी रात बीत जाने के बाद पुलिस ने खुद कर दी थी। राज्य सरकार ने इस बाबत सफाई दी है कि कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ न जाए और व्यापक स्तर पर हिंसा न भड़क जाए इसलिए रात में ही अंतिम संस्कार किया गया। एक दिन बाद बाबरी मस्जिद मामले में विशेष अदालत का फैसला भी आना था। इस नाते खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर अत्यधिक सर्तकता बरतने का कदम उठाया था। पीठ ने सभी पक्षकारों से इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही के बाबत सुझाव मांगे। साथ ही पूछा कि वह इस मामले में क्या कर सकते हैं?

अदालत ने पूछा
गवाहों और परिवार की सुरक्षा के इंतजाम कैसे हैं। पीड़ित परिवार के पास वकील है या नहीं और इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर क्या कार्यवाही चल रही है।

यूपी सरकार का हलफनामा
कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा से बचने के लिए परिवार की मर्जी से आधी रात करीब 2:30 बजे पीड़िता का अंतिम संस्कार किया गया।
राजनीतिक दल और नागरिक समाज संगठन हैं जाति विभाजन के प्रयास के लिए दोषी। हाथरस प्रशासन को 29 सितंबर से ही ऐसी कई खुफिया सूचनाएं मिली थीं कि सफदरजंग अस्पताल के बाहर धरना प्रदर्शन हुआ है और इस मामले को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश हो रही है।
अदालत की निगरानी में हाथरस कांड की जांच हो। सरकार निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट को अपनी निगरानी में हाथरस कांड की सीबीआइ जांच के निर्देश देने चाहिए।

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