लद्दाख में पीछे हटने को तैयार नहीं चीन, सेना के टॉप कमांडर्स ने दी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को जानकारी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को पूर्वी लद्दाख के रेजांग ला में एक पुनर्निर्मित वॉर मेमोरियल का उद्घाटन किया, जो समुद्र तल से 18000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसी जगह मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में 13 कुमांयू रेजिमेंट की कंपनी के जवानों ने 1962 में चीनी सैनिकों का बहादुरी से मुकाबला किया था।

गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख का दौरा किया जहां उन्होंने रेजांग ला में बने युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया। (फोटो: पीटीआई)

सेना के शीर्ष कमांडरों ने गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लद्दाख में गतिरोध वाले स्थान पर भारत द्वारा दावा की गई लाइनों से चीन के पीछे हटने से बार-बार इनकार करने की सूचना दी। मंत्रालय के सूत्रों ने ये जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि बैठक के दौरान रक्षा मंत्री को चीन के रवैये से अवगत कराया गया। इस बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूदा सुरक्षा स्थिति की भी समीक्षा की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को पूर्वी लद्दाख के रेजांग ला में एक पुनर्निर्मित वॉर मेमोरियल का उद्घाटन किया, जो समुद्र तल से 18000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसी जगह मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में 13 कुमांयू रेजिमेंट की कंपनी के जवानों ने 1962 में चीनी सैनिकों का बहादुरी से मुकाबला किया था।

इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के उत्तरी कमान के कमांडरों के साथ बंद कमरे में बैठक की। कमांडरों ने राजनाथ सिंह को चीन द्वारा देपसांग मैदान और हॉट स्प्रिंग्स के कब्जे वाले क्षेत्रों से पीछे हटने से इनकार करने की सूचना दी। समाचार पत्र द टेलीग्राफ के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि ये बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चली। इस दौरान कमांडरों ने एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन दिया और रक्षा मंत्री को भारत द्वारा दावा किए गए लाइनों के भीतर गतिरोध वाले स्थानों पर बड़े पैमाने पर चीनी जमावड़े के बारे में अवगत कराया।

बैठक के दौरान कमांडरों ने बताया कि कैसे चीनी सैनिकों ने एयरबेस और सैन्य शिविरों का निर्माण करके गतिरोध वाले स्थानों पर अपनी स्थिति को मजबूत किया है। वहीं मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि राजनाथ सिंह ने कमांडरों से कहा कि भारत इस मामले को फिर से चीनी सेना के साथ अगली सैन्य और राजनयिक वार्ता के दौरान उठाएगा।

बता दें कि पिछले साल मई के महीने से पूर्वी लद्दाख में कई स्थानों पर सीमा-विवाद को लेकर दोनों देश  आमने-सामने आए हैं। पिछले साल गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। जबकि कई महीनों बाद चीन ने अपने चार सैनिकों के मारे जाने पुष्टि की थी।

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