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आज देश में आपातकाल जैसी हालत: शरद यादव

समाजवादी विचारक और पूर्व सांसद सुरेंद्र मोहन की चौथी पुण्य तिथि पर बुधवार को देश भर के समाजवादी विचारकों, वामपंथियों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और आंदोलनकारियों ने एकजुटता दिखाते हुए गांधी शांति प्रतिष्ठान में एक गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी का विषय था-‘दक्षिणपंथी चुनौतियां, प्रगतिशील ताकतों की एकजुटता’। गोष्ठी का आयोजन सुरेंद्र मोहन मेमोरियल ट्रस्ट, युसूफ मेहरअली […]

Author Published on: December 18, 2014 12:35 PM

समाजवादी विचारक और पूर्व सांसद सुरेंद्र मोहन की चौथी पुण्य तिथि पर बुधवार को देश भर के समाजवादी विचारकों, वामपंथियों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और आंदोलनकारियों ने एकजुटता दिखाते हुए गांधी शांति प्रतिष्ठान में एक गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी का विषय था-‘दक्षिणपंथी चुनौतियां, प्रगतिशील ताकतों की एकजुटता’। गोष्ठी का आयोजन सुरेंद्र मोहन मेमोरियल ट्रस्ट, युसूफ मेहरअली सेंटर और जनता परिवार ने किया।

पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र सच्चर ने कहा कि बीमा क्षेत्र में एफडीआइ को लाने की कोशिश की गई और अडाणी को छह हजार करोड़ रुपए का कर्ज दिया गया है। लोग इसके खिलाफ है। इन्हें गोलबंद करने की जरूरत है। सपा के सांसद मुनव्वर सलीम ने कहा कि आज सद्भावना बनाए रखने के लिए लोगों को एकजुट करने की जरूरत है। राजनीति कारपोरेट के नियंत्रण में चली गई है और इस पर कुछ खास करने की जरूरत बढ़ गई है। राकांपा सांसद डीपी त्रिपाठी ने कहा कि लोकतंत्र और प्रगतिशील विचार एक साथ चलता है। पहली बार केंद्र में ऐसी सरकार बनी जिसे न तो अल्पसंख्यकों ने समर्थन दिया और न ही सरकार में उसकी हिस्सेदारी है। हम कह सकते हैं कि संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है यह सरकार।

जद(एकी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि आज देश अघोषित आपातकाल से गुजर रहा है। इसके खिलाफ देश में आंदोलन कैसे खड़ा हो यह जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल है। यादव ने कहा कि कांग्रेस असंगठित गिरोह था तो भाजपा एक संगठित गिरोह है। हम यह भी स्वीकार करते हैं कि हमारी गलती से ही देश में इस प्रकार के ताकतों की सरकार आई। भाजपा हिंदुओं के अंदर की बीमारियों को बरकरार रख मुसलमानों पर हमला कर रही है। हमें इन ताकतों से एकजुटता दिखाते हुए निबटने की जरूरत है।

माकापा सांसद मोहम्मद सलीम ने देश की अमन पंसद जनता को एकजुट करने की जरूरत बताते हुए कहा कि धर्म का इस्तेमाल गलत तरीके से हो रहा है। पाकिस्तान की तरह ही भारत में भी एक प्रयोग चल रहा है। इसका खमियाजा देश को एक न एक दिन भुगतना पड़ेगा। दानिश अली ने कहा कि जनता परिवार की एकजुटता की जरूरत बताते हुए कहा कि आज विकल्प के रूप में जनता परिवार है। स्वामी अग्निवेश ने कहा कि आज गरीबों का सवाल मुख्य धारा में नहीं है। आदिवासियों को कीड़े-मकोड़े की तरह देखा जा रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जीजी पारेख ने कहा कि आज सबसे महत्त्वपूर्ण कारपोरेट को रोकने की चुनौती है। विषय की रूपरेखा रखते हुए विजय प्रताप ने कहा कि यह देश भर में आयोजित समागम की 50 वीं कड़ी का हिस्सा है। सिर्फ चुनावी विकल्प बनाने से काम नहीं चलेगा बल्कि एकजुटता दिखाने से ही देश का भला होगा। पत्रकार कुरबान अली ने गोष्ठी के शुरू में सुरेंद्र मोहन का जीवन परिचय और समाजवादी आंदोलन में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में गांधी शांति प्रतिष्ठान की अध्यक्ष राधा बहन, सचिव सुरेंद्र कुमार, पूर्व विधायक सविता वाजपेयी, डा राज कुमार जैन, डा डीके गिरी और डा प्रेम सिंह सहित कई लोग मौजूद थे। संचालन समाजवादी समागम के डा सुनीलम ने किया। धन्यवाद ज्ञापन मंजू मोहन ने किया।

 

 

 

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