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वॉट्सऐप की नीति में बदलाव के बाद बढ़ा लाखों उपयोक्ताओं का रुझान, अब हर किसी को चाहिए सुरक्षित ‘सिग्नल’

वाट्सऐप की नई निजता नीति के कारण जानकार इस ऐप को छोड़ने की सलाह दे रहे हैे जिससे पिछले कुछ दिनों में एक संदेश प्रदाता ऐप सिग्नल तेजी के साथ लोगों के बीच छा गया है।

Author नई दिल्‍ली | Updated: January 13, 2021 7:10 AM
Whatsapp policyव्हट्सएप ने किया टर्म और कंडीशन में बदलाव। (फाइल फोटो)

आज गूगल प्ले स्टोर में भारत में सिग्नल मुफ्त ऐप डाउनलोड के मामले में पहले नंबर पर पहुंच गया जबकि आज सुबह तक वह तीसरे नंबर पर था। जबकि दो दिन पहले 34वें नंबर पर था। यह ऐप प्ले स्टोर पर मई 2010 में आया था लेकिन दस साल बाद वह इसलिए पसंदीदा बन गया क्योंकि वह निजता के मामले में सभी संदेश प्रदाता ऐप के मुकाबले कहीं अधिक उपयुक्त है। यह किसी व्यवसायी कंपनी का ऐप न होकर एक फाउंडेशन का ऐप है जो लोगों की आर्थिक मदद से चलता है।

एप्पल स्टोर पर सिग्नल ऐप दो दिन पहले ही शीर्ष स्थान पर पहुंच गया था। दरअसल, वॉट्सऐप की ओर से अपनी निजता संबंधी नीति में बदलाव के बाद उपयोक्ताओं के बीच सिग्नल ऐप के प्रति रुझान बढ़ा है। सूचना प्रौद्योगिकी के जानकारों का भी मानना है कि वॉट्सऐप के मुकाबले सिग्नल की निजता संबंधी नीति बेहतर है। इसके अलावा प्ले स्टोर पर ट्रेंडिंग में सिग्नल कुछ दिनों पहले से ही पहले स्थान पर बना हुआ है।

वॉट्सऐप ने अपने उपयोक्ताओं को एक संदेश भेजना शुरू किया है कि वे उसकी निजता संबंधी नीतियों को मंजूर करें अगर ऐसा नहीं करते हैं तो 8 फरवरी, 2021 के बाद वे वॉट्सऐप की सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

जानेमाने सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने कहा कि वॉट्सऐप अपनी निजता नीति में संशोधन कर रहा है जो आठ फरवरी तक लागू हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि पहले तो वॉट्सऐप आपकी जानकारी फेसबुक और उसकी अन्य कंपनियों को ही साझा करता था लेकिन नई नीति कहती है कि आपकी संवेदनशील जानकारी साझेदार कंपनियों और अन्य सेवा प्रदाताओं के साथ भी साझा की जाएगी। इसमें आपके लेनदेन, बैंक अकाउंट, क्रेडिट कार्ड नंबर, ‘आइपी एड्रेस’ आदि शामिल हैं। इससे सीधे-सीधे आपके निजता के अधिकार का हनन होगा।

दुग्गल ने कहा कि नई नीति में आपके डाटा की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी नहीं दी गई है। इससे आपकी जानकारी का दुरुपयोग संभव है। दुग्गल ने साफ कहा कि जो प्लेटफॉर्म हमें नीति को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं दे रहा है तो ऐसे में उस प्लेटफॉर्म को छोड़ने में ही भलाई है। उन्होंने बताया कि वॉट्सऐप के मुकाबले सिग्नल ज्यादा सुरक्षित है और आपकी निजता का पूरा ख्याल रखता है।

वहीं, एक अन्य मशहूर आइटी विशेषज्ञ विकास पांडेय ने बताया कि वॉट्सऐप को लेकर लोग जल्दबाजी में निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि सिग्नल वे सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाएगा जो वॉट्सऐप दे रहा है। हालांकि, उन्होंने सोशल मीडिया पर फेसबुक के बढ़ते एकाधिकार को खतरानाक बताया।

2010 से चल रहा है ऐप

सिग्नल मोबाइल ऐप अमेरिका की अलाभकारी संस्था सिगल फाउंडेशन और सिग्नल मैसेंजर की ओर से 25 मई 2010 को पहली बार प्ले स्टोर पर जारी किया गया। सिग्नल फाउंडेशन की वेबसाइट के मुताबिक उनका ऐप संदेशों को पूरी तरह से कूट भाषा में भेजता है। यह पूरी तरह से मुफ्त है और उपयोक्ताओं को कोई विज्ञापन भी नहीं दिखाया जाता है। इसका उपयोग यह मोबाइल के साथ डेस्कटॉप पर भी किया जा सकता है।

निजता की चाहत

जानेमाने सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने कहा कि नई नीति में आपके डाटा की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी नहीं दी गई है। इससे आपकी जानकारी का दुरुपयोग संभव है। दुग्गल ने साफ कहा कि जो प्लेटफॉर्म हमें नीति को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं दे रहा है तो ऐसे में उस प्लेटफॉर्म को छोड़ने में ही भलाई है। उन्होंने बताया कि वॉट्सऐप के मुकाबले सिग्नल ज्यादा सुरक्षित है और आपकी निजता का पूरा ख्याल रखता है।

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