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रामदेव के पतंजलि ट्रस्ट को फ़ायदा पहुंचाने को केंद्र ने आपत्ति करने वाले पदाधिकारी को किनारे किया, रातोंरात करवाया साइन

एमएसआरवीवीपी के सचिव रहे वी जद्दीपाल ने नियमों का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्रालय (जो उस समय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के रूप में जाना जाता था) को तीन बार पत्र लिखकर पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को बीएसबी की स्थापना के लिए अंतिम अनुमोदन का विरोध किया था।

Translated By सचिन शेखर नई दिल्ली | Updated: June 21, 2021 8:12 AM
Patanjali Ayurveda के सर्वेसर्वा और योग गुरु रामदेव। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट द्वारा वैदिक शिक्षा पर एक राष्ट्रीय स्कूल बोर्ड, भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) की स्थापना की जा सके इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक स्वायत्त संस्थान की आपत्तियों को 2019 में खारिज कर दिया गया था। पूरे मामले पर आपत्ति जताने वाले अधिकारी के बदले दूसरे पदाधिकारी से रातोंरात साइन करवा लिया गया था।

रामदेव को फायदा पहुंचाने के लिए परिषद की बैठक के रिकॉर्ड में एक महत्वपूर्ण एजेंडा को भी सरकार की तरफ बदला गया, ताकि इस पूरी प्रक्रिया को दो महीने में पूरा किया जा सके। जिससे कि 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले मंजूरी मिल जाए। बताते चलें कि उज्जैन स्थित महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान (MSRVVP), शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है, जो “वेद विद्या” को प्रोत्साहित करने और संरक्षित करने का काम करता है।

जनवरी 2019 में आयोजित अपनी गवर्निंग काउंसिल की एक बैठक में, MSRVVP की तरफ से एक बोर्ड स्थापित करने की बात की गयी। लेकिन उसे बीएसबी के लिए एक निजी प्रायोजक निकाय नियुक्त करने के लिए कहा गया। उस बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने की थी, जो उस समय एमएसआरवीवीपी के प्रमुख भी थे।

लेकिन उस समय एमएसआरवीवीपी के सचिव रहे वी जद्दीपाल ने नियमों का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्रालय (जो उस समय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के रूप में जाना जाता था) को तीन बार पत्र लिखकर पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को बीएसबी की स्थापना के लिए अंतिम अनुमोदन का विरोध किया था।

हालांकि, जद्दीपाल की आपत्तियों को मंत्रालय की तरफ से नज़रअंदाज कर दिया गया और मंत्रालय ने MSRVVP के एक अन्य अधिकारी, तत्कालीन उपाध्यक्ष रवींद्र अंबादास मुले से पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को चुनाव आचार सहिंता लागू होने से कुछ घंटे पहले अनुमोदन करवा लिया।

पूरे मामले पर इंडियन एक्सप्रेस द्वारा संपर्क किए जाने पर, जद्दीपाल ने कहा कि वह इस मामले पर कुछ भी बोलना नहीं चाहते हैं। वहीं मुले ने कहा कि वह अनुमोदन पत्र जारी करने के लिए अधिकृत थे क्योंकि जद्दीपाल उस दिन उपलब्ध नहीं थे। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें जद्दीपाल की आपत्तियों के बारे में पता था, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।

प्रकाश जावड़ेकर, जो अब सूचना और प्रसारण मंत्री हैं, ने अखबार द्वारा भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया और सुझाव दिया कि यह सवाल शिक्षा मंत्रालय से पूछा जाएं। वहीं पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट की तरफ से भी इंडियन एक्सप्रेस को कोई जवाब नहीं दिया गया।

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