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तृणमूल का आरोप- हरियाणा जल रहा था और मोदी चुप थे

केंद्रीय मंत्रियों ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी के बचाव में आगे आते हुए लोकसभा में विपक्षी सदस्यों को आगाह किया कि वे प्रधानमंत्री के खिलाफ नफरत भरी जुबान में बात न करें।

Author नई दिल्ली | February 27, 2016 11:17 AM
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फाइल फोटो)

सत्तारूढ़ दल के सदस्यों की ओर से प्रधानमंत्री के जोरदार बचाव के बीच शुक्रवार को सदन में विपक्ष के हमले जारी रहे। हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान प्रशासन की ‘नाकामी’ का जिक्र करते हुए तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सुल्तान अहमद ने आरोप लगाया कि राज्य में आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा पर प्रधानमंत्री कुछ नहीं बोले। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इसका खंडन किया।  केंद्रीय मंत्रियों ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी के बचाव में आगे आते हुए लोकसभा में विपक्षी सदस्यों को आगाह किया कि वे प्रधानमंत्री के खिलाफ नफरत भरी जुबान में बात न करें। लोकसभा में शुक्रवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर चल रही चर्चा के दौरान सुल्तान अहमद द्वारा की गई टिप्पणी के संदर्भ में राजनाथ और फिर उनके बाद रूड़ी ने चर्चा के बीच में हस्तक्षेप किया।

बिहार विधानसभा चुनाव में विशेष पैकेज की घोषणा के संदर्भ में अहमद ने कहा कि प्रधानमंत्री राज्यों में जाते हैं तो वे ऐसे बात करते हैं, मानों उनके लिए ट्रंकों में रुपया भर कर लाए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हरियाणा में जाट आंदोलन में भड़की हिंसा पर प्रधानमंत्री जब कुछ नहीं बोले, तो गृहमंत्री राजनाथ सिंह को आगे आना पड़ा। इस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि इस प्रकार के बेबुनियाद आरोप लगाना कि प्रधानमंत्री पैसे लेकर जाते हैं, मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि हरियाणा जाट आंदोलन में जो भी कार्रवाई की गई वह प्रधानमंत्री से विचार-विमर्श के बाद ही की गई। इसके कुछ देर बाद ही रूड़ी ने भी कहा कि देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ इतनी नफरत भरी जुबान में बात करना सही नहीं है। पूरा देश इस बात को देख रहा है।

बीजद के भर्तृहरि महताब ने कहा कि चुनाव में बड़े-बड़े वादे कर मोदी ने युवाओं की उम्मीदें जगाई थीं, लेकिन पिछले दो-तीन महीनों से देश की जनता और युवाओं की उम्मीदें, नाउम्मीदी में बदलने लगी हैं। अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में गिरावट आ रही है। कार निर्माण क्षेत्र के अलावा कोई अन्य क्षेत्र रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं कर पा रहा है। इससे युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। लोग अब कहने लगे हैं कि ये अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार की अगली कड़ी नहीं है बल्कि कांग्रेस नीत यूपीए-1 और यूपीए-2 की अगली कड़ी यूपीए-3 नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पिछले दिनों जो कुछ हुआ, वह मोदी द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए जाने और बेरोजगारी के बढ़ते जाने के खिलाफ युवाओं के असंतोष का प्रतीक है।

जेएनयू प्रकरण का जिक्र किए बिना सुल्तान अहमद ने कहा कि सरकार राष्ट्रवाद की दुहाई दे रही है। लेकिन उसके अपने शीर्ष अधिकारी कहते हैं कि देश में अल्पसंख्यकों की हालत ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और रविंद्र नाथ टगौर जैसे महान नेताओं ने वैश्विक राष्ट्रवाद का नारा दिया था। लेकिन भाजपा का राष्ट्रवाद खाने पर प्रतिबंध लगाता है। बोलने पर प्रतिबंध लगाता है।

उन्होंने आक्रोशित शब्दों में कहा कि भाजपा की सरकार में राष्ट्रवाद की परिभाषा संघ तय करेगा। संघ ही यह तय करेगा कि देश की जनता क्या खाए और क्या बोले? संसद भवन परिसर में लगे एक शिलालेख पर लिखे वसुधैव कुटुंबकम का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अगर भाजपा इन शब्दों में यकीन नहीं रखती है तो उसे इस शिलालेख पर कालिख पोत देनी चाहिए।

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