पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर “चुनाव चिह्न की जंग” छिड़ गई है। पार्टी के दो गुट आमने-सामने हैं। एक गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं, जबकि दूसरा गुट पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति वफादार गुट है।

टीएमसी के दोनों गुट पार्टी पर अपना नियंत्रण होने का दावा कर रहे हैं। साथ ही वे ‘जोड़ा फूल’ (दो फूल)'(jora phool (two flower)’ वाले चुनाव चिह्न पर अपना अधिकार का दावा कर रहे हैं। यह चुनाव चिह्न ममता बनर्जी की पहचान रहा है। जिसे उन्होंने कांग्रेस से अलग होने के बाद अपनी पार्टी बनाने के बाद अपनाया था।

अब इस विवाद को सुलझाने के लिए चुनाव आयोग ने शनिवार को नई दिल्ली में दोनों गुटों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। आयोग ने ममता बनर्जी को अपना अंतिम पक्ष रखने के लिए बुधवार दोपहर 3 बजे तक का वक्त दिया है। इलेक्शन कमीशन ने उनसे कहा कि अगर उनके पास कहने के लिए या अपना पक्ष रखने के लिए कुछ और है या कोई अतिरिक्त दस्तावेज देना है तो वह तय वक्त के अंदर जमा करें। साथ ही इन दस्तावेजों की प्रतियां बागी गुट को भी उपलब्ध कराएं।

इलेक्शन कमीशन ने आगे कहा कि जरूरत पड़ने पर गुरुवार को सुनवाई की जा सकती है।

बात दें, बुधवार को ही पश्चिम बंगाल की दो खाली विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख भी है। इनमें नंदीग्राम सीट भी शामिल है। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से हार का सामना करना पड़ा था।

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिए पत्र में चुनाव आयोग ने कहा कि उसने ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के साथ-साथ ममता बनर्जी के गढ़ कालीघाट के प्रतिनिधिमंडल की भी बातों को सुना है। जिसे उनके गुट के पर्याय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। दोनों पक्षों के पास अपने-अपने दावों का समर्थन करने वाले कुछ दस्तावेज हैं।

ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी कल्याण बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है। उसने हमें 16-17 सितंबर को उपस्थित होने के लिए कहा है। हमारे उम्मीदवार पार्टी के चिह्न पर उपचुनाव लड़ेंगे।

इसी खेमे के एक अन्य नेता कुणाल घोष ने ऋतब्रता बनर्जी पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि तृणमूल किसी की निजी संपत्ति नहीं है। घोष ने कहा कि वे इस तरह की कोई टिप्पणी नहीं कर सकते कि तृणमूल किसी की निजी संपत्ति है। वे ममता बनर्जी को धोखा दे रहे हैं, जिन्होंने पार्टी को खड़ा किया है।

हालांकि, उन्होंने तकनीकी पहलुओं पर बोलने से इनकार कर दिया और कहा कि ममता बनर्जी और पार्टी के वकील कल्याण बनर्जी सहित पार्टी नेतृत्व इस मामले की जांच कर रहा है।

पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल में फूट को भाजपा के लिए राजनीतिक लाभ में बदलते हुए दावा किया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी का सफाया हो चुका है। उन्होंने कहा कि तृणमूल पार्टी अब कहां खड़ी है? तृणमूल का सफाया हो चुका है। हम जानते हैं कि रेजिनगर और नंदीग्राम उपचुनावों में क्या होगा?”

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी दल की कमान संभालकर सबको चौंका देने वाले ऋतब्रता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने अपने पूर्व प्रमुख को लिखे चुनाव आयोग के पत्र को पढ़ लिया है।

उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। चुनाव आयोग ने हमें कल समय दिया था। हमने आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की, अपनी बात रखी और उनके सभी सवालों के जवाब दिए। कल भी हमने ईमेल के साथ कुछ हार्ड कॉपी जमा की थीं।” बनर्जी ने आगे कहा कि उन्हें और ममता बनर्जी को भेजे गए पत्रों की सामग्री एक ही थी और यह एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग जल्द ही कोई निर्णय लेगा।

चुनाव चिन्ह को लेकर कल्याण बनर्जी की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि न तो आप और न ही मैं यह तय कर सकते हैं कि टीएमसी का चिह्न किसे मिलेगा। इस बारे में फैसला सिर्फ चुनाव आयोग ही कर सकता है।

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