पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में मचा सियासी घमासान अब कोलकाता से दिल्ली पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से करीब 20 सांसद दिल्ली के एक गुप्त स्थान पर ठहरे हुए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे और TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में मौजूद हैं।

सूत्रों का कहना है कि इन 20 सांसदों के बीच दो प्रमुख विकल्पों पर चर्चा चल रही है। पहला- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर यह मांग करना कि उन्हें अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले संसदीय दल से अलग एक स्वतंत्र समूह के रूप में मान्यता दी जाए। दूसरा विकल्प- जिस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, वह सामूहिक इस्तीफा देने का है।

टीएमसी के भीतर जारी इस राजनीतिक उथल-पुथल ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। अगर सांसदों का यह समूह किसी एक विकल्प पर आगे बढ़ता है तो इसका असर ना केवल पार्टी की संसदीय ताकत पर पड़ेगा बल्कि पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में भी इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय का राज्यसभा से इस्तीफा

इससे पहले तृणमूल के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी की प्राथमिकता सदस्यता और राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया था।

रॉय ने अपने बयान में कहा, “हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में राज्य के लोगों ने पहली बार भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में भारी जनादेश दिया है। यह जनादेश टीएमसी के 15 वर्षों के अराजक शासन को समाप्त करने के उद्देश्य से दिया गया है जो व्यापक और बेलगाम भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे क्षेत्रों में गंभीर विफलताओं से चिह्नित रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “इस बीच नव-निर्वाचित जन सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र के अनुरूप पश्चिम बंगाल के समग्र विकास और पुनर्निर्माण के लिए पहल शुरू कर दी है।”

उन्होंने आगे कहा, “जनता के इस ऐतिहासिक जनादेश का सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हुए मैंने आज राज्यसभा (काउंसिल ऑफ स्टेट्स) की सदस्यता और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।”

पार्टी में बढ़ते असंतोष को नियंत्रित करने की कोशिश में ममता बनर्जी ने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। हालांकि अभिषेक बनर्जी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने हुए हैं। लेकिन राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है। राजनीतिक गलियारों में इस कदम को ममता बनर्जी द्वारा संगठनात्मक फैसलों में अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

टीएमसी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा, “ममता बनर्जी पहले ही समझ चुकी थीं कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच सबसे ज्यादा असंतोष अभिषेक बनर्जी को लेकर है। संगठनात्मक फेरबदल के दौरान उन्होंने डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन जैसे वरिष्ठ नेताओं को अभिषेक की सहायता के लिए जगह दी। अब वह पार्टी के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी विश्वसनीयता दोबारा स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं।”