तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है। राज्यसभा सांसद और ममता बनर्जी की करीबी नेता सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता देव असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से भी मुलाकात की। इससे राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। सुष्मिता देव का इस्तीफा टीएमसी के लिए एक और बड़ी राजनीतिक चुनौती बनकर सामने आया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सचिवालय पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंपा। उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब टीएमसी पहले से ही पार्टी के भीतर असंतोष और नेताओं की नाराजगी का सामना कर रही है।

सुष्मिता देव टीएमसी के उन नेताओं में शामिल रही हैं जिन्हें पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत चेहरा माना जाता था। वह कांग्रेस छोड़कर वर्ष 2021 में टीएमसी में शामिल हुई थीं और तब से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं।

हालांकि, उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे टीएमसी के लिए एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

इससे पहले टीएमसी के भीतर असंतोष और टूट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के 58 विधायकों ने नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विधानसभा स्पीकर को पत्र भेजकर अलग गुट बनाने का दावा किया था। इन विधायकों ने निष्कासित नेता ऋतब्रता बनर्जी को अपना नेता चुना, जिसे स्पीकर की मान्यता मिलने की भी बात कही जा रही है।

वहीं, लोकसभा में भी टीएमसी को झटका देते हुए सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में करीब 20 सांसदों के बागी रुख अपनाया था। इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की थीं। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि ये सांसद एनडीए को समर्थन दे सकते हैं।

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पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के चुने हुए जनप्रतिनिधियों का जैसा रुख देखने में आ रहा है, उससे एक बार फिर यही साफ होता है कि देश की राजनीति में अब सुविधा और तात्कालिक लाभ की प्रवृत्ति तेजी से हावी होती जा रही है। इस क्रम में शुचिता, नैतिकता और सिद्धांतों की जगह सिकुड़ती जा रही है और कुछ नेताओं के लिए सत्ता का संरक्षण तथा उसकी सुविधा ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो चुकी है। हाल ही में पश्चिम बंगाल में अट्ठावन विधायकों ने तृणमूल कांग्रेस से अलग होने की घोषणा कर दी थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक