ममता का MP मॉनसून सत्र के लिए सस्पेंडः शांतनु सेन ने IT मंत्री के हाथ से छीन फाड़ा था पेपर, बोले वैष्णव- TMC हिंसा की संस्कृति संसद में ला रही है

शुक्रवार को राज्यसभा शुरू होते ही सभापति एम वेंकैया नायडू ने तृणमूल सांसद शांतनु सेन के मानसून सत्र से निलंबन की घोषणा की।

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के हाथ से कॉपी छीन कर फाड़ देने की घटना को लेकर राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने टीएमसी सांसद शांतनु सेन को पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया। (एक्सप्रेस फोटो/ एएनआई)

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के हाथ से कॉपी छीनकर फाड़ देने को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सांसद शांतनु सेन को पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। तृणमूल कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा को शुक्रवार को 11 बज कर करीब 25 मिनट पर दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

शुक्रवार को राज्यसभा शुरू होते ही सभापति एम वेंकैया नायडू ने शांतनु सेन के मानसून सत्र से निलंबन की घोषणा की। नायडू ने कहा कि कल जो कुछ हुआ, उससे निश्चित रूप से सदन की गरिमा प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान मंत्री के हाथ से कागज छीन लिया गया और फाड़ दिया गया। इस तरह की घटना संसदीय लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। इस घटना से मैं बहुत व्यथित हूं।

वहीं कल की घटना को लेकर आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि TMC की बंगाल में हिंसा की संस्कृति रही है और वो ही संस्कृति वो संसद में लाने की कोशिश कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में भाजपा के कार्यकर्ताओं पर जिस तरह की हिंसा की, उसी संस्कृति को आज वो संसद में ला रहे हैं। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी इस घटना को लेकर कहा कि विपक्ष सड़क पर सिर फोड़ता है और सदन में कागज फाड़ता है। सवाल उठाते हैं लेकिन जवाब सुनने को तैयार नहीं होते। कल की घटना लोकतंत्र को शर्मसार करती है। 

ज्ञात हो कि कल सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव इजराइली स्पाईवेयर पेगासस के जरिए भारतीयों की कथित जासूसी के मुद्दे पर सदन में बयान दे रहे थे। उसी दौरान तृणमूल कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दल के सदस्य हंगामा करते हुए आसन के सामने आ कर नारेबाजी करने लगे। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद शांतनु सेन ने केंद्रीय मंत्री के हाथों से बयान की कॉपी छीन ली और उसके टुकड़े कर दिए। केंद्रीय मंत्री वैष्णव हंगामे और शोरगुल के कारण अपना बयान पूरा नहीं पढ़ सके। लिहाजा उन्होंने इसे सदन के पटल पर रख दिया।

उपसभापति हरिवंश ने हंगामा कर रहे सदस्यों से असंसदीय व्यवहार ना करने की अपील की लेकिन जब उनकी एक ना सुनी गई तो उन्होंने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी थी।

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