तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने रविवार को भाजपा पर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गाड़ी पर हुए कथित हमले का आरोप लगाया। उत्तर 24 परगना में ममता बनर्जी की गाड़ी पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकी गईं। यह घटना उस वक्त घटी जब ममता बनर्जी कथित तौर पर पुलिस हिरासत में मृत एक टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं। इस दौरान टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और डोला सेन उनके साथ थीं।
कल्याण बनर्जी ने इस घटना को हत्या की कोशिश बताया और आरोप लगाया कि यह हमला ममता बनर्जी को निशाना बनाकर किया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही। कल्याण बनर्जी ने कहा कि पूरी कार में एक भी पल ऐसा नहीं बीता जब पत्थर न फेंके गए हों। हर पल पत्थर फेंके जा रहे थे। ममता बनर्जी को निशाना बनाकर उन पर हमला किया जा रहा था।
उन्होंने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे और दावा किया कि यह घटना पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई। उन्होंने कहा कि सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता वहां मौजूद थे और पुलिस मूकदर्शक बनी रही, बिल्कुल मूक दर्शक। कल्याण बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का निर्देश था। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया था।
अभिषेक बनर्जी क्या आरोप लगाया?
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा भड़काने का आरोप लगाया और कहा कि ममता बनर्जी पर दिवंगत पार्टी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जाते समय “क्रूरतापूर्वक हमला” किया गया।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह घटना राज्य में व्यापक कानून-व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि और अब, राज्य की एक पूर्व मुख्यमंत्री जो शोक संतृप्त परिवार से मिलने जा रही थीं, उन पर भाजपा द्वारा भेजे गए गुंडों ने बेरहमी से हमला किया। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया और कहा कि यह घटना शासन की विफलता को दर्शाती है।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यह सिर्फ राज्य पुलिस की विफलता नहीं है। यह शासन व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस टीएमसी कार्यकर्ताओं और शोक संतृप्त परिवार की रक्षा करने में विफल रही है और सवाल उठाया कि क्या राज्य में राजनीतिक हिंसा शासन का एक उपकरण बन गई है।
डोला सेन ने कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
राज्यसभा सांसद डोला सेन ने कहा कि ममता बनर्जी टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने गई थीं, जिसकी कथित तौर पर पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्हें इस यात्रा पर जाने से रोका जाना चाहिए था। सेन ने कहा कि हमारे कार्यकर्ता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। यह एक तरह से लॉकअप में हुई मौत के समान है। उनकी पत्नी पार्षद हैं। आप ही बताइए, न्याय के सिद्धांत के अनुसार, क्या हमारी नेता ममता बनर्जी को उस परिवार से मिलने नहीं जाना चाहिए?
डोला सेन ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के वाहन पर पत्थर और ईंटें फेंकी गईं और दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ता और पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने दीदी पर लक्षित तरीके से हमला किया। भाजपा के गुंडे और पुलिसकर्मी सामने खड़े होकर ईंट और पत्थर फेंक रहे थे, जिससे दीदी की कार का शीशा टूट गया। सेन ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की यात्रा कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि मृतक कार्यकर्ता के परिवार से मिलने की एक कोशिश थी।
ममता बनर्जी ने खुद आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों के सामने उनकी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए और कहा कि इस हमले में गंभीर चोटें आ सकती थीं या मौत भी हो सकती थी। उन्होंने कहा कि पुलिस के सामने ही असामाजिक तत्वों ने मेरी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके। हमला इतना भीषण था कि अगर खिड़कियां खुली होतीं तो मेरा सिर फट जाता। हम सब मारे जा सकते थे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस भाजपा को संरक्षण प्रदान कर रही है और कहा कि उन्होंने पहले कभी ऐसी घटना नहीं देखी थी। उन्होंने कहा कि यह सब पुलिस के सामने हुआ। मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा। आखिर चल क्या रहा है? इस घटना को लेकर पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कथित हमले में भाजपा की किसी भी संलिप्तता से इनकार किया और ममता बनर्जी के वाहन पर पत्थर या अन्य वस्तुएं फेंकने की निंदा की।
‘अगर खिड़कियां खुली होतीं तो मेरा सिर फट जाता’, ममता बनर्जी के काफिले पर हुआ हमला
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हमले पर बात करते हुए कहा, “मेरे को बड़े-बड़े पत्थर मारे गए। बाहर से आए हुए कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस के सामने ही मेरी कार पर हमला किया। गाड़ी पर हमला इतना जबरदस्त था कि अगर कार की खिड़कियां खुली होतीं, तो मेरा सिर फट जाता। हम सब मारे जा सकते थे। यह सब पुलिस के सामने हुआ। मैंने पहले ऐसा कुछ कभी नहीं देखा। यह क्या हो रहा है? पुलिस बीजेपी को सुरक्षा दे रही है।” पढ़ें पूरी खबर।
