West Bengal News: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और वाम मोर्चा एक हालिया समाचार पत्र की रिपोर्ट के आधार पर भ्रम और विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “कोई हलचल नहीं है। हलचल कहां है? विपक्ष के पास तो जनता का समर्थन भी नहीं है। कल सेरामपुर में अदालत से अनुमति लेकर हुई बैठक को देखिए, बस वीडियो देखिए। वे सिर्फ डेढ़ सौ लोगों की भीड़ के साथ बैठक कर रहे हैं। वह 15 साल तक मुख्यमंत्री रहीं और छह बार सांसद बनीं। ये सब इन पांच महीनों में गायब हो गया, सचमुच सब खत्म हो गया है। नाम या चिन्ह का कोई नामोनिशान नहीं बचा है। पार्टी तीन-चार टुकड़ों में बंट गई है।”

तृणमूल और वामपंथियों की स्थिति के बारे में शुभेंदु ने कहा, “तृणमूल का जन्म वामपंथियों के 34 वर्षों के दमन के विरुद्ध हुआ था और आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए वही तृणमूल सीपीएम के साथ हाथ मिला रही है, जो हवा में गायब हो चुकी है। यह घिनौनी साजिश विधानसभा के भीतर भी उजागर हो गई है।”

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “ममता बनर्जी द्वारा फैलाए जा रहे झूठ की तस्वीर बिल्कुल साफ है। 60 लाख में से 27 लाख प्रविष्टियों को तार्किक विसंगतियों के कारण न्यायिक अधिकारियों, विशेष रूप से ईआरओ द्वारा खारिज किया गया था। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने एसआईआर अवधि के दौरान एक बार नहीं, बल्कि बीस बार सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के माध्यम से पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिला न्यायाधीशों को नियुक्त किया, उन तार्किक विसंगतियों के संबंध में अदालत का व्यापक हस्तक्षेप हुआ।”

सीएम ने आगे कहा, “न्यायिक प्रक्रिया में विसंगतियों का मामला था। ममता बनर्जी, एमए बेबी, राहुल गांधी को केरल में भी जाकर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए। तिरुवनंतपुरम जाकर वहां भी विरोध करें। एसआईआर को लेकर वहां स्थिति अनुकूल है, कांग्रेस ने जीत हासिल की है, जबकि बिहार और पश्चिम बंगाल में स्थिति काफी बिगड़ गई है। एसआईआर प्रक्रिया में तार्किक विसंगतियों के मामले में पश्चिम बंगाल एक पूर्ण अपवाद है।”

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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया बीजेपी को बंगाल में चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए की गई। ममता बनर्जी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…