TMC Internal Crisis: पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस आंतरिक बगावतों और नेताओं की नाराजगी का सामना कर रही है। इस बीच एक बड़ी खबर यह भी है कि सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाला टीएमसी का बागी गुट अभी इंतजार में है। बगावती गुट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर विघटन की मान्यता हासिल करने वाली मांग के पहले एक बड़े नेता के उनके खेमे में शामिल होने की उम्मीद कर रहा है।
इस मुद्दे पर सूत्र ने बताया कि विद्रोही खेमा ऐसे ही एक वरिष्ठ सांसद के संपर्क में है लेकिन अभी तक उनके हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। लोकसभा में टीएमसी के विघटन को तीन दिन हो चुके हैं, जिसके चलते बागी विधायकों की सूची को लेकर तरह-तरह के दावे और आरोप लगाए जा रहे हैं। बागी विधायकों द्वारा अभी तक बिरला को पत्र न लिखने का एक कारण किसी मजबूत राजनीतिक नेता का इंतजार है। उनका कहना है कि इससे बागी खेमे की विश्वसनीयता बढ़ेगी और ममता बनर्जी के खिलाफ उनकी चुनौती को मजबूती मिलेगी।
एनडीए का समर्थन करना चाहते हैं बागी गुट
तृणमूल की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार इस विद्रोह का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने दावा किया है कि लोकसभा में तृणमूल के 28 सांसदों में से 20 सांसदों का एक अलग गुट मान्यता प्राप्त करना चाहता है और एनडीए के साथ गठबंधन करना चाहता हैं। जब उनसे पूछा गया कि तृणमूल सांसदों को विद्रोह के लिए किस बात ने मजबूर किया, तो उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि व्यापक भ्रष्टाचार के बीच कुशासन और लोकतंत्र का अभाव था। हमने पार्टी इसलिए छोड़ी है क्योंकि हम सार्वजनिक जीवन में बने रहना चाहते हैं और जनसेवा जारी रखना चाहते हैं।
दो तिहाई सांसद के समर्थन की बात
काकोली घोष से बागियों की आगे की योजना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि फिलहाल हमने एनडीए के साथ रहने और उसे पूरा समर्थन देने का फैसला किया है। बाद में हम एक साथ बैठकर तय करेंगे कि किस तरह का समर्थन देना चाहिए। लोकसभा में तृणमूल की दो-तिहाई सीटें बागी खेमे के पास हैं, जिससे वे दलबदल विरोधी कानून के दायरे से बाहर हैं।
तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे गहरे संकट के बीच दो अनुभवी नेताओं ने ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व की भूमिका के खिलाफ आवाज उठाई है लेकिन साथ ही इस बात पर जोर दिया है कि वे ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं।
सौगत रॉय का बड़ा दावा
सौगत रॉय ने अभिषेक बनर्जी की मनमानी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि तृणमूल प्रमुख को इस पर ध्यान देना होगा। कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को वकील पद से हटाए जाने के बाद उन पर निशाना साधते हुए कहा है कि ममता बनर्जी को अभिषेक और हमारे बीच चुनाव करना होगा। सौगत रॉय ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बागी सांसद की दो मुख्य शिकायतें हैं, जिनमें से एक है कि अभिषेक बनर्जी की मनमानी। दूसरी यह कि पार्टी के भीतर उनकी शिकायतों को सुनने वाला कोई नहीं है।
ऐसे में जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने खुद इस मनमानी को महसूस किया है, तो इस मुद्दे को लेकर उन्होंने जवाब दिया व्यक्तिगत रूप से तो नहीं, लेकिन आम तौर पर लोगों की प्रतिक्रियाएं मैंने देखी हैं। इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि वे फिलहाल ममता बनर्जी के साथ हैं। दूसरी ओर कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी द्वारा उन्हें वकील के पद से हटाने के कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “मैंने कहा था, मुझे कूड़ेदान की तरह मत समझो।” मुझे बता दो कि मैं इस मामले में पेश होऊंगा या नहीं। बाद में उन्होंने मुझे बताया कि अयान भट्टाचार्य यह केस लड़ेंगे इसलिए मैंने केस छोड़ दिया। मुझे वकालत का 45 साल का अनुभव है।”
दिल्ली से बंगाल तक, ममता के सामने चुनौतियां
अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा कि उन्हीं की वजह से हमें ‘चोर चोर’ सुनना पड़ रहा है और हमारी जान को खतरा है। पार्टी के बुरे दौर में भी मैं दीदी के साथ खड़ा हूं… ममता बनर्जी को फैसला करना होगा कि वो अभिषेक के साथ रहेंगी या हमारे साथ, जो उनसे नाखुश हैं।
बता दें कि ममता बनर्जी अब दो मोर्चों पर लड़ रही है। कोलकाता और दिल्ली इसमें शामिल है। पार्टी के 80 विधायकों में से 58 ने विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में शोवनदेब चट्टोपाध्याय के चयन के खिलाफ बगावत कर दी और विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता के रूप में समर्थन दिया है।
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टीएमसी में फूट के बीच कई मीडिया रिपोर्ट्स में चर्चा है कि टीएमसी-कांग्रेस का विलय हो सकता है। पार्टी में जारी उठा-पठक के बीच टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बुधवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। वहीं, दूसरी ओर पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार ने कहा कि आखिरकार सभी को कांग्रेस में आना ही होगा। पढ़िए पूरी खबर…
