चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं दलाई लामा, तिब्बती नेता ने बताई वजह

दलाई लामा के प्रतिनिधि गेशे दोरजी दामदुल ने कहा कि चीन दलाई लामा को अपने सबसे बड़े दुश्मनों के रूप में देखता है, जिन पर वह हावी नहीं हो सकता है।

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दलाई लामा के प्रतिनिधि गेशे दोरजी दामदुल ने कहा कि अमेरिका और भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों को एक साथ आकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चीन ऐसे ही अपनी आक्रामकता जारी ना रखे। (एक्सप्रेस फोटो)

बीते दिनों नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने दलाई लामा के प्रतिनिधि से मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर चीन बिफर गया और उसने अमेरिका को अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देने को कहा। अमेरिकी विदेश मंत्री से मिलने वाले दलाई लामा के प्रतिनिधि गेशे दोरजी दामदुल ने कहा है कि दलाई लामा चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं और उन्होंने इसके पीछे की वजह भी बताई।

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में दलाई लामा के प्रतिनिधि गेशे दोरजी दामदुल ने कहा कि चीन दलाई लामा को अपने सबसे बड़े दुश्मनों के रूप में देखता है, जिन पर वह हावी नहीं हो सकता है। साथ ही चीन सोचता है कि पूरी दुनिया दलाई लामा के साथ खड़ी है ना कि चीन के। गेशे दोरजी ने यह भी कहा कि चीन के आम लोग भी दलाई लामा को पसंद करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं।

इस दौरान दोरजी ने यह भी कहा कि जब चीन के राष्ट्रपति ने हाल ही में तिब्बत की राजधानी ल्हासा का दौरा किया था तो लोगों ने डर के साथ उनका स्वागत किया। लेकिन जब दलाई लामा के प्रतिनिधियों ने लगभग 20-30 साल पहले तिब्बत का दौरा किया था, तो सबने यह देखा था कि कैसे तिब्बत के लोगों ने उनका दिल खोल कर स्वागत किया था।

साथ ही गेशे दोरजी ने अमेरिकी विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद चीन की चेतावनी को लेकर कहा कि अगर विश्व के देश इसको नजरअंदाज करेंगे तो जो तिब्बत के साथ हुआ वह दूसरे देशों में भी दोहराया जा सकता है और फिर दुनिया को पछताने के सिवा कुछ और नहीं मिलेग। साथ ही देशे ने कहा कि अगर चीन सैन्य और आर्थिक रूप से अमेरिका से आगे निकल जाता है तो दुनिया उनके हाथों में होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों को एक साथ आकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चीन ऐसे ही अपनी आक्रामकता जारी ना रखे।

बता दें कि दलाई लामा से चीन की खुन्नस बहुत पुरानी है। दरअसल 1912 में 13वें दलाई लामा ने तिब्बत को स्वतंत्र देश घोषित कर दिया था। बाद में जब 14वें दलाई लामा की घोषणा की जा रही थी तो चीन ने तिब्बत के ऊपर हमला कर दिया। जिसके बाद दलाई लामा को भारत में शरण लेनी पड़ी। चूंकि चीन तिब्बत को अपना हिस्सा मानता है इसलिए वह दलाई लामा से काफी खुन्नस खाए रहता है।

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