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बिहार में अंतरराष्ट्रीय थिएटर महोत्सव

बेगूसराय में अंतरराष्ट्रीय थिएटर महोत्सव चल रहा है। महोत्सव का उद्घाटन विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) के मौके पर किया गया। आशीर्वाद रंगमंडल की ओर से बिहार में प्रथम अंतरराष्ट्रीय थिएटर महोत्सव का आगाज़ हुआ रंगकर्मी रतन थियम के नाटक ‘मैकबेथ’ से।

Author नई दिल्ली | April 1, 2016 01:48 am
(File Photo)

बेगूसराय में अंतरराष्ट्रीय थिएटर महोत्सव चल रहा है। महोत्सव का उद्घाटन विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) के मौके पर किया गया। आशीर्वाद रंगमंडल की ओर से बिहार में प्रथम अंतरराष्ट्रीय थिएटर महोत्सव का आगाज़ हुआ रंगकर्मी रतन थियम के नाटक ‘मैकबेथ’ से।

रतन थियम का यह नाटक किसी एक बिंदु या किसी एक चरित्र या किसी एक संवाद से शुरू नहीं होता बल्कि यह अपनी परिधि में पूरे उस माहौल को समाहित और व्याख्यायित करता हुआ चलता है जो किसी काले घने जंगल की जंगली पुकारों से परिपूर्ण है। वस्तुत: इस नाटक का मूल स्वर ही जीवंत वनस्पतियों की हरी-नीली रोशनी और विचित्र ध्वनियों का संगम है जो मैकबेथ के चरित्र को चुड़ैलों-सा जामा पहनाती है।

यहां ‘चुड़ैलें’ वैश्विक स्तर पर हमारे उस देशकाल का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहां जीवन पर संकट है। जहां तक परिधान, आभूषण और वेशभूषा का प्रश्न है तो ऐसा प्रतीत होता है कि यह कई सारे जनजातीय समाजों का मिश्रण-सम्मिश्रण है जो वास्तव में इस नाटक की आदिम पहचान और स्वरूप को चिह्नित और व्याख्यायित करता है।

महोत्सव का दूसरा दिन नाम रहा नॉर्वे के ग्रुसोम्हेतेंस थिएटर के नाम। प्रस्तुति थी- व्हाट अ ग्लोरियस डेज। जिसका निर्देशन किया था लार्स ओयनो ने। यह नाटक नॉर्वे के कलाकार बेनडिक रीस के जीवन और कार्यों से प्रेरित था। रीस के अनुभवों और कला के बहाने इस नाटक का उद्देश्य व्यक्ति के मानव बने रहने के आधारभूत पहलुओं के बारे में बात करना था। ओयनो का यह नाटक जहां एक ओर घर के प्रति लगाव और सुरक्षा को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर जब हम अनिच्छा के साथ एक जटिल भौतिक और सामाजिक जगह से अलग होते हैं तो उससे उपजने वाली चिंता और असुरक्षा को भी दर्शाता है।

तीसरे दिन की प्रस्तुति थी द साउंड आॅफ़ अ व्हाइस जो ताइवान के एक्स थिएटर एशिया थिएटर ग्रुप की प्रस्तुति थी जिसका निर्देशन किया था चौंगथम जयंत मित्तई ने। यह नाटक लोगों के बीच अलगाव को कम करने और घनिष्ठता को बढ़ाने पर आधारित है। यह अद्भुत काव्यात्मक और संगीतात्मक प्रस्तुति मानव के भीतर छुपे उन अहंकारों को उजागर करती है, जो मानव के भीतर रह कर उसे अंदर ही अन्दर खोखला बनाते रहते हैं और खत्म करते रहते हैं। चीनी भाषा की यह प्रस्तुति एशियाई रंगमंचीय सौन्दयर्बोध से ओतप्रोत थी।

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